अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
09.02.2007

राग-संवेदन

रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर

निरन्तरता
डॉ. महेंद्र भटनागर

हो विरत ...
एकान्त में,
जब शान्त मन से
भुक्त जीवन का
सहज करने विचारण -
झाँकता हूँ
आत्मगत
अपने विलुप्त अतीत में -

चित्रवली धुँधली
उभरती है विश्रृंखल ... भंग-क्रम
संगत-असंगत
तारतम्य-विहीन!
औचक फिर
स्वतः मुड़
लौट आता हूँ
उपस्थित काल में!
जीवन जगत जंजाल में!


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें