ओ प्रिय सुख-गंध भरी मदमत्त हवा! मेरी ओर बहो - हलके-हलके! बरसाओ मेरे तन पर, मन पर शीतल छींटें
जल के! ओ प्यारी लहर-लहर लहराती उन्मत्त हवा! निःसंकोच करो बढ कर उष्ण स्पर्श मेरे तन का! ओ, सर-सर स्वर भरती मधुरभाषिणी मुखर हवा! चुपके-चुपके मेरे कानों में अब तक अनबोला कोई राज कहो मन का! आओ! मुझ पर छाओ! खोल लाज-बंध आज आवेष्टित हो जाओ, आजीवन अनुबन्धित हो जाओ!