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09.16.2007

राग-संवेदन

रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर

हवा
डॉ. महेंद्र भटनागर

ओ प्रिय
सुख-गंध भरी
     मदमत्त हवा!
मेरी ओर बहो -
     हलके-हलके!
बरसाओ
मेरे
तन पर, मन पर
     शीतल छींटें जल के!
ओ प्यारी
लहर-लहर लहराती
उन्मत्त हवा!
निःसंकोच करो
बढ कर उष्ण स्पर्श
     मेरे तन का!
, सर-सर स्वर भरती
मधुरभाषिणी
     मुखर हवा!
चुपके-चुपके
मेरे कानों में
अब तक अनबोला
कोई राज कहो
     मन का!
आओ!
मुझ पर छाओ!
खोल लाज-बंध
     आज
आवेष्टित हो जाओ,
आजीवन
अनुबन्धित हो जाओ!


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