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09.02.2007

राग-संवेदन

रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर

राग-संवेदन
डॉ. महेंद्र भटनागर

सब भूल जाते हैं ...
केवल
याद रहते हैं
आत्मीयता से सिक्त
             कुछ क्षण राग के,
संवेदना अनुभूत
रिश्तों की दहकती आग के!
आदमी के आदमी से
प्रीति के सम्बन्ध
जीती-भोगती सह-राह के
                  अनुबन्ध!
केवल याद आते हैं!
सदा।
जब-तब
बरस जाते
व्यथा-बोझिल
निशा के
           जागते एकान्त क्षण में,
           डूबते निस्संग भारी
           क्लान्त मन में!
अश्रु बन
पावन!


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