राग-संवेदन रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर
सड़ती लाशों की दुर्गन्ध लिए छूने गाँवों-नगरों के ओर-छोर जो हवा चली - उसका रुख बदलो! जहरीली गैसों से अलकोहल से लदी-लदी गाँवों-नगरों के नभ-मंडल पर जो हवा चली उससे सँभलो! उसका रुख बदलो!