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10.30.2007

राग-संवेदन

रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर

प्रार्थना
डॉ. महेंद्र भटनागर

सूरज,
ओ, दहकते लाल सूरज!
बुझे
मेरे हृदय में
ज़िन्दगी की आग
            भर दो!
थके निष्क्रिय
तन को
स्फूर्ति दे
गतिमान कर दो!
सुनहरी धूप से,
आलोक से -
परिव्याप्त
हिम / तम तोम
            हर लो!
सूरज,
ओ लहकते लाल सूरज!


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