राग-संवेदन
रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर
अब तो धरती अपनी, अपना आकाश है! सूर्य उगा लो फैला सर्वत्र प्रकाश है! स्वधीन रहेंगे सदा-सदा पूरा विश्वास है! मानव-विकास का चक्र न पीछे मुड़ता साक्षी इतिहास है! यह प्रयोग-सिद्ध तत्व-ज्ञान हमारे पास है!