राग-संवेदन
रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर
धूर्त - सरल दुर्बल को ठगने धोखा देने बैठे हैं तैयार! धूर्त - लगाये घात, छिपे इर्द-गिर्द करने गहरे वार! धूर्त - फरेबी कपटी चौकन्ने करने छीना-झपटी, लूट-मार हाथ-सफाई चतुराई या सीधे मुष्टि-प्रहार! धूर्त - हड़पने धन-दौलत पुरखों की वैध विरासत हथियाने माल-टाल कर दूषित बुद्धि-प्रयोग! धृष्ट, दुःसाहसी, निडर! बना रहे छद्म लेख-प्रलेख! चमत्कार! विचित्र चमत्कार!