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10.30.2007

राग-संवेदन

रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर

 अपहर्ता
डॉ. महेंद्र भटनागर

धूर्त -
सरल दुर्बल को
ठगने
धोखा देने
           बैठे हैं तैयार!
धूर्त -
लगाये घात,
छिपे
इर्द-गिर्द
          करने गहरे वार!
धूर्त -
फरेबी कपटी
             चौकन्ने
करने छीना-झपटी,
लूट-मार
हाथ-सफाई
चतुराई
         या
             सीधे मुष्टि-प्रहार!
धूर्त -
हड़पने धन-दौलत
पुरखों की वैध विरासत
हथियाने माल-टाल
कर दूषित बुद्धि-प्रयोग!
धृष्ट,
दुःसाहसी,         
निडर!
बना रहे
छद्म लेख-प्रलेख!
चमत्कार!
विचित्र चमत्कार!


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