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10.12.2007

राग-संवेदन

रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर

संवेदना
डॉ. महेंद्र भटनागर

काश, आँसुओं से मुँह धोया होता,
बीज प्रेम का मन में बोया होता,
दुर्भाग्यग्रस्त मानवता के हित में
अपना सुख, अपना धन खोया होता!


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