राग-संवेदन
रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर
भूल जाओ - मिले थे हम कभी! चित्र जो अंकित हुए सपने थे सभी! भूल जाओ - रंगों को बहारों को, देह से : मन से गुज़रती कामना-अनुभूत धारों को! भूल जाओ - हर व्यतीत-अतीत को, गाये-सुनाये गीत को : संगीत को!