राग-संवेदन
रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर
शेष जीवन जी सकूँ सुख से तुम्हारी याद काफ़ी है! कभी कम हो नहीं एहसास जीवन में तुम्हारा यह बिछोह-विषाद काफ़ी है! तुम्हारी भावनाओं की धरोहर को सहेजा आज-तक मन में, अमरता के लिए केवल उन्हीं का सरस गीतों में सहज अनुवाद काफ़ी है!