राग-संवेदन
रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर
याद आता है तुम्हारा प्यार! तुमने ही दिया था एक दिन मुझको रुपहले रूप का संसार! सज गये थे द्वार-द्वार सुदर्श बन्दनवार! याद आता है तुम्हारा प्यार! प्राणप्रद उपहार!