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10.12.2007

राग-संवेदन

रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर

 वरदान
डॉ. महेंद्र भटनागर

याद आता है
तुम्हारा प्यार!
तुमने ही दिया था
एक दिन
मुझको
         रुपहले रूप का संसार!
सज गये थे
द्वार-द्वार सुदर्श
             बन्दनवार!
याद आता है
तुम्हारा प्यार!
प्राणप्रद उपहार!  


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