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10.12.2007

राग-संवेदन

रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर

 राग-संवेदन / 2
डॉ. महेंद्र भटनागर

तुम -
बजाओ साज
     दिल का,
ज़िन्दगी का गीत
मैं -
     गाऊँ !
उम्र यों
     ढलती रहे,
उर में
धड़कती साँस यह
      चलती रहे!
दोनों हृदय में
स्नेह की बाती लहर
      बलती रहे!
जीवन्त प्राणों में
परस्पर
भावना - संवेदना
     पलती रहे!
तुम -
सुनाओ
इक कहानी प्यार की
      मोहक,
सुन जिसे
मैं -
चैन से  
  कुछ क्षण
       कि सो जाऊँ!
दर्द सारा भूल कर
मधु-स्वप्न में
       बेफ़िक्र खो जाऊँ!
तुम -
बहाओ प्यार-जल की
      छलछलाती धार,
चरणों पर तुम्हारे
स्वर्ग - वैभव
मैं -
      झुका लाऊँ!


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