राग-संवेदन
रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर
अचानक आज जब देखा तुम्हें - कुछ और जीना चाहता हूँ! गुज़र कर बहुत लम्बी कठिन सुनसान जीवन-राह से, प्रतिपल झुलस कर ज़िन्दगी के सत्य से उसके दहकते दाह से, अचानक आज जब देखा तुम्हें - कड़वाहट भरी इस ज़िन्दगी में विष और पीना चाहता हूँ! कुछ और जीना चाहता हूँ! अभी तक प्रेय! कहाँ थीं तुम? नील-कुसुम!