अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
10.14.2014


70.
नया सवेरा
स्मिता, अमरेन्द्र

मंत्री जी के कहे अनुसार दो महीने तक विजय देश के विकास का एजेंडा बनाने में लगा रहा। पूरे मंत्रालय के स्टाफ को बुलाकर उनसे बातें करना, उनकी शक्ति, व कमजोरी को जानना आदि उसका मुख्य काम हो गया था। किस बात से वे प्रोत्साहित होंगे, इसके जोड़-घटाव में वह लगा रहता। इस दौरान, उसने ना सिर्फ लोगों से बातें की, बल्कि उन किताबों को भी खंगालता रहा, जिसे वह पहले बेकार समझता था। इससे पहले वह सोचता था कि मैनेजमेंट और रिसर्च की किताबें रोजमर्रा की जिंदगी में किसी काम की नहीं होती हैं। इसे पढ़ने से कोई लाभ नहीं मिलता है। नौकरी में आने के बाद आदमी इसका इस्तेमाल ही नहीं कर पाता है। इतने बड़े मिशन को पूरा करने के लिए वह उन सभी किताबों के पन्नों को खंगालता रहता, जिसमें प्लानिंग, ऑर्गेनाइजेशन, स्टाफिंग आदि आदि विषयों का वर्णन रहता था।

उसने अपने प्रोजेक्ट में किताब की बातों का बखूबी इस्तेमाल भी किया। पिछले दो महीनों में वह मंत्रालय के लोगों में एक नई ऊर्जा का संचार करने में कामयाब हो गया था। उसने अपनी रिपोर्ट तैयार कर मंत्री जी को सौंप दी। उसने उनसे कहा कि हमारे कार्यालय के सभी लोग इस प्रोजेक्ट में योगदान देने के लिए तैयार हैं। इस आश्वासन से मंत्री जी गदगद हो गए!

पहले भी कैबिनेट की बैठक के दौरान उनके मंत्रालय की काफी तारीफ हुई थी। पिछले 100 दिनों की रिव्यू में उनके मंत्रालय के कामकाज को अच्छा माना गया था। औसत से ऊँचा। उस समय भी यही सब स्टाफ थे। उनका खुश होना लाजिमी था।

उन्होंने विजय से दीपावली के दिन मंत्रालय के सभी लोगों को उनके आवास पर आमंत्रित करने के लिए कहा, जहाँ मनीष को मंत्रालय का राजदूत घोषित किया जाएगा और अन्य लोगों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें