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ISSN 2292-9754

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10.14.2014


69.
नया सवेरा
स्मिता, अमरेन्द्र

विकास की बातों को विजय ने ध्यान से सुना। इन बातों को अमली जामा पहनाने के लिए वह विकास को मंत्रालय के एडवाइजरी काउंसिल में शामिल करवाना चाहता था। उसने एडवाइजरी काउंसिल में नियुक्ति के लिए एक नोटशीट तैयार की। इसमें उसने कई नाम के साथ विकास और अरुण के नाम को भी शामिल किया और फाइल मंत्री जी के सामने पुटअप कर दिया। मंत्री जी ने उसे ध्यान से पढ़ा और पूछा- "अब तक किस प्रकार के लोगों को एडवाइजरी काउंसिल में रखा जाता रहा है?"

विजय, "अभी तक तो जाने-माने लोगों को शामिल करने की प्रथा रही है। जो लोग राजनीति की गोटी सेट करने में माहिर होते हैं, उन्हें ही मौका मिल पाता है। अच्छे और विचारवान लोग इससे नहीं जुड़ पाते हैं।"

मंत्री, "अपनी फील्ड में महारथ हासिल करने वाले लोग भी तो प्रतिभावान होते हैं। काम की वजह से ही उनका नाम हुआ होगा।"

विजय, "सर मेरा अब तक का अनुभव है कि ऐसे लोगों के पास काम का अनुभव होता है, लेकिन यहाँ आने पर काम की बजाय जोड़-तोड़ में लग जाते हैं। उनका एक अलग वर्ग बन जाता है। उनकी सोच आम लोगों से बिल्कुल भिन्न होती है। वे विदेश यात्रा करते हैं और वहाँ की नकल यहाँ थोपना चाहते हैं। भारत को भी दूसरे देशों की तरह बनाना चाहते हैं।"

मंत्री, "अच्छा यह बात है सरकार है। अब हम एडवाइजरी काउन्सिल में वैसे लोगों को शामिल कर कतई नहीं करोड़ों रुपया सरकार का व्यर्थ जाने देंगे। आपका पहले वाला रिपोर्ट भी मैं देख चुका हूँ। काफी अच्छा है। उसकी एक-दो बातों को मैंने कैबिनेट में भी रखा है, जो अप्रूव हो चुका है। हाँ आपकी पहले वाली रिपोर्ट में किन-किन लोगों का योगदान था?"

विजय, "उसमें कई लोगों का योगदान था, लेकिन अपने कार्यालय में डेटा इंट्री और लेटर डिस्पैच करने वाले कर्मचारी मनीष का इसमें काफी योगदान है।"

मंत्री, "हाँ, यह हुई न बात। अपने मंत्रालय में जो अपने स्टाफ हैं, उन्हें कम्पीटेंट बनाने की कोशिश की जाए। उनमें छुपी हुई प्रतिभा को ढूंढने का प्रयास किया जाए। एक और एक दो नहीं, बल्कि ग्यारह के सिद्धांत पर काम किया जाए।"

विजय, "जी सर।"

मंत्री, "केवल, कार्यालय को नया लुक देने से काम नहीं चलेगा। मंत्रालय की कार्यशैली को बदलने की कोशिश की जाए। आपने कई तरह की योजनाएँ बनाई हैं। इनमें कौन अच्छे हैं या बुरे, मैं कह नहीं सकता। इस पर सभी लोगों की अलग-अलग राय ली जाए। आम लोग इसे किस रूप में लेते हैं, उनकी फीडबैक ली जाए। इस काम में अपने स्टाफ का इस्तेमाल किया जाए। मुझे मालूम है कि लोग मेहनती और सक्षम भी हैं। ज़रूरत है उनको दिशा देने की। आप दो महीने में लोगों की एक टीम तैयार करें और अच्छी तरह जांच-परख लें कि कौन क्या कर सकता है? जो लोग अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें मोटिवेट भी करें। जैसे उस लड़का .....क्या नाम बताया आपने?"

"मनीष।"

मंत्री, "हाँ, मनीष उसे कुछ इनाम भी दें, ताकि दूसरे लोगों में भी आगे निकलने की और अच्छा काम करने की ललक बढ़े। उनके ज्ञान, कौशल को बढ़ाने के लिए प्रोफेसर व प्रोफेशनल्स की भी मदद ली जाए। वे कार्यालय में आकर लोगों को ज़रूरत के आधार पर ट्रेनिंग देंगे। स्टाफ यह महसूस नहीं करें कि मंत्री ही सर्वेसर्वा होता है। उन्हें हमसे डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। हम एक-एक कर सबसे मिलेंगे। हम सब एक ही परिवार के सदस्य हैं। हमारा एक ही लक्ष्य है- देश को आगे बढ़ाना। हम मनीष को अपने मंत्रालय का राजदूत बना देंगे। अभी आप इस बात को किसी से न बतायें। आप दो महीने में हमें पूरी रिपोर्ट सौपें।"

विजय, "जी सर। ठीक है, यही करते हैं।"


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