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ISSN 2292-9754

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10.06.2014


65.
नया सवेरा
स्मिता, अमरेन्द्र

रात में हल्की बारिश के बाद मौसम में ताजगी आ गई। सुबह में सूर्य की किरणें सीधी पृथ्वी पर पड़ रही हैं, लेकिन उष्णता की कमी है। विजय सात बजे ही घर से निकल गया है, ताकि मंत्री जी के आवास पर समय से पहुँचा जाए। रास्ते में कई तरह के विचार उसके मन में आ रहे हैं। अब तक वह कई लोगों का विचार जान चुका था, जिसे इकट्ठा कर कागज पर उतारने में सफल भी रहा था। मंत्री जी को रिपोर्ट दिखाने के लिए वह प्रिंट भी ले चुका है। यह करीब 150 पेज के आसपास है।

विजय को मालूम है कि उसकी किस्मत का फैसला आज होने वाला है। पहले ही काफी देर हो चुकी है। आज मंत्रीजी की टीम निश्चित तौर पर तैयार हो जाएगी। कम से कम निर्णय तो ज़रूर ले लिया जाएगा। वह सोच रहा है कि यह 150 पेज का ड्राफ्ट है, इसे पूरा पढ़ पाना उनके लिए संभव तो नहीं होगा। अब उम्मीद है, तो बस मंटू पर। उसने उन्हें मेरे बारे में जैसा फीडबैक दिया होगा, उसी पर निर्णय लिया जाएगा।

यह सोचते-सोचते उसने तुरंत फोन निकाला और मंटू को डायल कर दिया। उधर से आवाज आती है ‘करेन्टली स्विच्ड ऑफ।’ विजय के दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं। उसे समझ में कुछ भी नहीं आ रहा है, लेकिन हारना उसने जीवन में सीखा नहीं है। इसलिए वह अपने दिमाग का घोड़ा दौड़ा रहा है। किस प्रकार अपनी बातों को मंत्रीजी के सामने रखा जाए, इसी उधेड़बुन में वह उनके घर पर पहुँच जाता है। पहुँचते ही सीधे वह उनके पास चला जाता है।

मंत्रीजी लॉन में पैर सामने पड़ी कुर्सी पर रखकर अखबार के पन्नों को पलट रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस, हिन्दु, दैनिक जागरण आदि अखबारों की प्रतियाँ रखी हुई हैं। अभी वे टाइम्स ऑफ इंडिया पढ़ रहे हैं। विजय उनके पास पहुँच कर गुड मार्निंग बोलता है और कुछ देर खड़ा रहता है। मंत्री जी पेपर टेबुल पर रखते हुए उसे बैठने के लिए कहते हैं।

एक हाथ अपने चश्मे पर रखकर पूछते हैं, "क्या खबर है? कैसा काम चल रहा है?"

विजय, "सर ठीक चल रहा है।" अपने साथ जो उसने प्रसाद लाया था, वह मंत्री जी की ओर बढ़ा देता है।

मंत्री जी प्रसाद लेते हैं और पूछते हैं, "शिरडी गए थे क्या? चलिए अच्छा किया।"

विजय, "जी सर, मैंने सोचा कि अभी वक्त है, वहाँ से होकर चला आता हूँ। फिर आगे समय मिले या नहीं। मैंने आपके कहे अनुसार सभी आइडियाज़ को एक जगह इकट्ठा कर लिया है। यह है उसकी रिपोर्ट।"

मंत्री जी, "अरे, आपने तो बहुत अच्छा काम किया है। यह रिसर्च पेपर जैसा लग रहा है।"

विजय, "नहीं सर, मैंने आपकी सहूलियत के लिए ऐसा किया। यह रिसर्च पेपर नहीं है, बल्कि इसमें वे आइडियाज़ हैं, जिसपर रिसर्च किया जा सकता है। इसके बाद देश हित में कार्यक्रम व पॉलिसिज की रूपरेखा तैयार की जा सकती है।" कुछ सोचते हुए मंत्रीजी रिपोर्ट को एक ओर रख देते हैं। वे पूछते हैं कि इसमें सबसे विशेष बात क्या है, जिसे प्राथमिकता दी जाए और लागू भी कराया जा सके?

विजय असमंजस में पड़ गया। उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है कि आगे क्या बोले! संभलते हुए उसने कहा कि सर! वैसे शुरू करने के लिए कई योजनाएँ हैं, लेकिन मैंने जो सोचा है, उसपर पहले आपसे चर्चा कर लेता हूँ, क्योंकि ज़रूरत है दिशा देने की। और सर, मंत्री के रूप में आपका यह पहला टर्म है, इसलिए कुछ ऐसा करें कि वास्तव में वह क्रांतिकारी कदम साबित हो।

मंत्रीजी, "हाँ, तुम ठीक सोच रहे हो।"

विजय, "सर, आपको मालूम है कि अब आम आदमी को केंद्र में रखकर ही काम किया जा रहा है। हमें भी उसी के इर्द-गिर्द काम करना है।

मैं कई लोगों से बात करने पर इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि आदमी के विकास के लिए 3 सी और देश के विकास के लिए 4 डी की ज़रूरत है।"

"क्या मतलब," मंत्री जी ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा।

विजय, "सर, 3 सी का मतलब कम्युनिकेशन, कॉन्फिडेंस ऐंड कम्प्यूटर।

वहीं 4 डी मिन्स
1. डी....... डिविजन इन सोसायटी
2. डी ..... डिलीवर इन टाइम
3. डी....... डेवलपमेन्ट टू द डोर
4 डी......... डिस्ट्रक्शन ऑफ नेशनल प्रापर्टी

सर मेरा मतलब है कि कॉन्फिडेंस हमारे देश में है। कम्युनिकेशन में हम पीछे नहीं हैं। हमारे बच्चे अपनी मातृभाषा में सबसे आगे हैं। देश के कुछ कोने में इंग्लिश को लेकर परेशानी हो रही है। अब कम्प्यूटर का जमाना है, तो हमें केवल अपने बच्चों को मैथ्स का टेबल याद करने करने के लिए नहीं कहना चाहिए, बल्कि एच टी एम एल टैग सीखना भी नितांत आवश्यक है। सर, अगर गाँव में एक या दो लोग भी एच टी एम एल यानी कम्प्यूटर की भाषा सीख गए, तो देश में क्रांति आ जाएगी।"

मंत्री जी, "क्या बकवास कर रहे हो यार! क्या हो गया है आज तुम्हें? जब से आए हो, बक-बक ही कर रहे हो।"

विजय, "सर, आई एग्री सर, लेकिन मुझे एक मौका दें।"

मंत्री जी, "मौका दें? तुम कहना क्या चाहते हो?"

विजय, "सर, वही मुझे अपनी बातों को रखने का।"

"हाँ बोलो।"

विजय, "सर क्या है न इतना बड़ा प्रोजेक्ट देश में चल रहा है, यूआईडी। यह सब धोखा है। इससे आम लोगों को कोई लेना-देना नहीं है। मैं आपको इसका विकल्प बताता हूँ सर। सर एच टी एम एल टैग वेबसाइट बनाने का लैंग्वेज है। यह काफी आसान है। यदि गाँव के बच्चे इसे सीख जाते हैं, तो वे अपने-अपने गाँव की वेबसाइट बनाएँगे। वे वहाँ के बारे में सभी सूचनाएँ अपलोड करते जाएँगे। हम दिल्ली में बैठे, उस गाँव से जुड़ी सभी सूचना, प्रॉब्लम, यहाँ तक कि उनका सॉल्यूशन भी जान जाएँगे, क्योंकि वह मात्र एक क्लिक की दूरी पर होगा।

वहाँ सड़क बन रही है या नहीं, बिजली के खंभे लगे हैं या नहीं बीडीओ साहब निरीक्षण करने पहुँचे हैं, पुल निर्माण का काम धीमी गति से चल रहा है या तेज गति से। इन सभी चीजों की जानकारी तुरंत मिल जाएगी।"

मंत्री जी, "वह कैसे?"

विजय, "सर, गाँव वाले मोबाइल से उसकी फोटो खींचकर वेबसाइट पर अपलोड कर देंगे। यह अभी असंभव लग रहा है, लेकिन जब इस पर काम शुरू हो जाएगा, तब यह अधिक कठिन नहीं रह जाएगा। यदि इस काम में कई लोगों को लगा दिया जाएगा, तो यह बहुत आसान हो जाएगा।"

मंत्री जी, "लोगों को कैसे शामिल किया जा सकेगा?"

विजय, "सर! पंचायत का एक आदमी भी इस काम को सीख गया, तो वह दस और लोगों को सिखा देगा। कुछ ही दिनों में सभी गाँव डब्लू डब्लू डब्लू डॉट विलेज डॉट कॉम पर उपलब्ध हो जाएगा। इससे किसी एक आदमी की पहचान करना भी संभव हो सकता है। दिल्ली पुलिस बिहार या मणिपुर के किसी भी आदमी की सूचना फोटो सहित कुछ क्षण में प्राप्त कर लेगी।

मंत्री जी सोचने की मुद्रा में आ जाते हैं। उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। वे कहते हैं, "यह आइडिया मुझे जंच तो रहा है, लेकिन देख लो कहीं यह शेखचिल्ली के हसीन सपने तो नहीं बन जाएँगे!"

विजय, "नहीं सर, मेरे कुछ दोस्त कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर से जुड़े हुए हैं। उनसे मैंने बात की थी। वे लोग काफी उत्साहित हैं। संभव है कुछ दिनों में वे अपनी फुल रिपोर्ट हमें भेज दें!"

मंत्री जी, "चलिए अच्छा है।"

विजय, "सर, कुछ देर पहले मैंने आपको बताया कि 4 डी में देश के विकास की फिलॉसफी छुपी हुई है। हम देख सकते हैं कैसे देश में विकास को पीछे ढकेलकर डिवाइड को बढ़ाया जा रहा है।"

मंत्री जी, "यह अच्छी और अभिनव कल्पना है। इस पर एक पाइलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया जा सकता है।"

"जी सर।"

मंत्री जी, "अच्छा यह बताइए ऑफिस की क्या स्थिति है? इस पर किस तरह काम करना है?"

विजय, "सर, पहले आप अपने स्टाफ की टीम बना लें, फिर काम आसानी से हो जाएगा।"

मंत्री जी, "हाँ, मैंने निर्णय ले लिया है। किसे कहाँ रखना है, मैं उसकी लिस्ट भेज दूंगा। अगले सप्ताह से सभी स्टाफ पूरे हो जाएँगे। हाँ, आप अब तक एडिशनल प्राइवेट सेक्रेटरी- एपीएस की हैसियत से काम कर रहे थे। मैं आपको ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी-ओएसडी के लिए भेज रहा हूँ।"

विजय के चेहरे पर प्रसन्नता की झलक दिखाई पड़ी, लेकिन वह इसे जाहिर नहीं होने दिया। उसने थैंक यू बोला। हालांकि उसे मलाल भी है कि उसे ओएसडी बनाया गया, वह पीएस बनना चाहता था। लेकिन वह इस बात से खुश है कि ओएसडी को मंत्री का सबसे करीब आदमी माना जाता है।

 मंत्री जी, "ठीक है, कल ऑफिस आते हैं। आपका सोचने का नजरिया ठीक है। इसी तरह काम करें और जनरल फिलॉसफी की जगह मंत्रालय को आगे कैसे बढ़ाया जाए, इस पर काम करें। मैं समझता हूँ कि हम लोग अच्छा काम करेंगे। बहुत कुछ करना है, लगता है साठ साल में कोई भी काम ठीक ढंग से नहीं हो पाया है। अब आप जाइए, गुड लक।"

विजय, "थैंक यू सर।"


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