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ISSN 2292-9754

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09.17.2014


51.
नया सवेरा
स्मिता, अमरेन्द्र

गाड़ी को दिल्ली पहुँचने में करीब दो घंटे लगेंगे। सुबह में नित्य क्रिया से निवृत होकर वीणा खिड़की से बाहर देख रही थी। विजय भी नींद से जागने के बाद बाहर देखने लगा। बारिश के बाद मौसम काफी अच्छा हो गया था। खेतों में लगी हुई फसल पर पड़ रही सुबह की सूर्य की किरणें आभा बिखेर रही थी। वीणा छूटते ही बोली, "विजय देखो कितना अच्छा दृश्य है। मेरी इच्छा होती है कि कुछ दिनों तक ऐसे वातावरण में ही रहें।"

विजय, "हाँ, वीणा तुम ठीक कह रही हो। मुझे भी बड़ा अच्छा महसूस हो रहा है। कल रात मैं काफी देर तक जागता रहा। मैं खिड़कियों से लगातार बाहर झांकता रहा था, उस दौरान कई तरह के विचार मेरे मन में आ रहे थे।"

"विचार आ रहे थे?," वीणा पूछी।

समझ में नहीं आता है कि तुम्हें क्या बताऊँ? और क्या नहीं? हर चीज में विरोधाभास है। किसी समय कुछ अच्छा लगता है, तो कुछ समय बाद वही चीज खराब लगने लगती है।

वीणा, "ऐसी बातें क्यों कर रहे हो, वह भी सुबह-सुबह।"

विजय, "तुमको बताया न। कल रात मैं काफी वक्त तक सोचता रहा था। सोचते-सोचते कब नींद आ गई, पता भी नहीं चला।"

विजय ने उत्सुकतावश पूछा, हम बच्चों का बर्थ डे मनाते हैं, तो क्या करते हैं-कैंडिल बुझा देते हैं, क्या यह सही है? भारतीय परम्परा में कोई भी शुभ काम करने से पहले दीप प्रज्ज्वलित किया जाता है, लेकिन यहाँ उल्टा किया जा रहा है।"

वीणा, "नहीं कैंडिल जलाते हैं, उसके बाद बुझाते हैं, यह तो सिम्बोलिक है। इसमें क्या बुराई है।"

"मैं बुराई की बात नहीं कह रहा हूँ। मैं तुम्हें दूसरी बात का ध्यान दिलाना चाहता हूँ।"

"क्या कहा?"

"मेरे कहने का मतलब है कि हम लोग किसी भी चीज को आँखें मूंद कर अपना लेते हैं। हम उसके आगे-पीछे नहीं सोचते हैं। अगर हम बच्चों का बर्थ डे मनाते हैं, तो हमें सिर्फ पश्चिमी तौर-तरीकों का नकल नहीं करना चाहिए।"

वीणा बोली, "पाँच कैंडल बुझा दिए, यानी पाँच साल का हो गया बच्चा। छठा कैंडल जलता रहता है, यानी छठे वर्ष में वह प्रवेश कर रहा है। तुम देखो, पहले जलाया गया फिर बुझाया गया। तुम नाकारात्मक क्यों सोच रहे हो।"

"मैं नाकारात्मक नहीं सोच रहा हूँ।"

विजय ने पूछा, "क्या 16 साल का होने पर सोलह कैंडल जलाया जाता है? एक ही जलाया जाता है और उसे बुझा दिया जाता है। क्यों यह उचित है?"

"नहीं, कदापि नहीं।"

"फिर"

"इसका क्या अर्थ निकाला जाए, " विजय ने सवाल दागा।

"सोचना होगा।"

विजय के पास इसके जवाब मौजूद थे। इसका सीधा अर्थ है। इसमें अधिक दिमाग खर्च करने की कोई ज़रूरत नहीं है। यह प्रथा अपने यहाँ की नहीं है।

यह बाहर से होते हुए हिन्दुस्तान आई है और इसका भारतीयकरण नहीं किया गया।

वीणा, "हाँ, ठीक बोल रहे हो। यह विचार अच्छा है। ठीक है तुम इस पर सोचो। इसमें कोई बुराई नहीं है।"

विजय, "हाँ, लेकिन सरकार इसे सही नहीं भी मान सकती है।"

वीणा, "यह ज़रूरी नहीं है कि हर बात को चिल्लाकर बताने के बाद ही किया जाए। बगैर मंत्रीजी को बताए भी तुम बहुत कुछ कर सकते हो।"

"हाँ, मैं करूँगा। अब केवल काम करना है, इतना निश्चित है। लेकिन समस्या यह है कि क्या करें और कैसे शुरू किया जाए काम? यह सोचना अब बेहद ज़रूरी है। हमें अपनी प्राथमिकता तय करनी होगी और सामंजस्य बिठाकर सभी काम को अंजाम देना होगा। विचारों की कमी नहीं है। केवल हमें दृढ़ निर्णय लेना है। इसमें मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। तुम समाजशास्त्री हो। सामाजिक अपेक्षाएँ, सामाजिक परिवर्तन का तुम्हें मुझसे बेहतर ज्ञान है। तुम मुझे अपनी सलाह देते रहना।"

"हाँ, ठीक है।" कहकर वीणा ने विजय को फ्रेश होने के लिए कहा। विजय फ्रेश होने टॉयलेट चला गया।

"मैं दूसरा उदाहरण देता हूँ। पहले बड़े अफसर सूट-बूट में हमेशा रहते थे, क्योंकि उन्हें अपनी पोशाक से रौब दिखाना होता था। पंखा खराब है, गर्मी लग रही है लेकिन वे कोट-पैंट नहीं उतारते थे। अब ऐसा नहीं है। अब एसी की सुबिधा है कोट-पैंट पहने भी रहा जा सकता है। लेकिन इसमें परिवर्तन आ गया है। वे हाफ शर्ट और पैंट में रहते हैं, क्योंकि फॉरनर्स भी अब इसी स्टाइल में रहते हैं। मेरे कहने का मतलब यह है कि पढ़े-लिखे लोग हमेशा सही सोचें, ऐसा कतई नहीं है। वे भारतीयता को ध्यान में रखकर किसी भी चीज को भारतीयकरण करने के बारे में सोचें, तब ही लाभ मिलेगा। अंधानुकरण करने से नहीं।"

वीणा बोली, "हाँ ऐसा तो होना ही चाहिए।"

विजय, "तुम्हें मैं बता दूॅ कि हमारी विरासत काफी समृद्ध है। हमें किसी दूसरे देश के नकल की ज़रूरत नहीं है। इसे नजरअंदाज करना कतई ठीक नहीं है। ज़रूरत है तो केवल वर्तमान परिस्थितियों में व्यक्ति को ढालने की। यह कोई मुश्किल बात नहीं है।"

"क्या?"


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