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ISSN 2292-9754

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08.20.2014


44.
नया सवेरा
स्मिता, अमरेन्द्र

विजय और वीणा को साईं बाबा का दर्शन करने में किसी भी तरह की परेशानी नहीं हुई। दर्शन के बाद वे दोनों काफी प्रसन्न हैं। वे आपस में बातचीत कर रहे हैं। कितने दिनों से हमलोग साईं बाबा के दर्शन का प्लान बना रहे थे, लेकिन मौका नहीं मिल पा रहा था। किसी-न-किसी कारणवश हम यहाँ नहीं आ पाते थे। शायद बाबा हमलोगों को बुलाना नहीं चाहते थे।

वीणा बोली, "लेकिन जब बाबा ने बुलाया तो हमलोग तुरंत आ गए। हमें काफी अच्छा लग रहा है। हमें पहले ही यहाँ आ जाना चाहिए था। मन में सुखद-सी अनुभूति हो रही है। ऐसा मालूम हो रहा है कि शरीर में नई ऊर्जा का संचार हो रहा है।"

"यह तुम सही कह रही हो। दर्शन के बाद मुझमें भी आत्मविश्वास आ गया है। यहाँ आने से पहले कई तरह की बातें मन में आ रही थीं। लेकिन अब सभी प्रकार का संशय खत्म हो गया है। साईंबाबा की महिमा अपार है। मैंने तुम्हें उस घटना के बारे में बताया है या नहीं। साईं बाबा के आशीर्वाद से एक व्यक्ति के साथ चमत्कार हुआ था।"

"नहीं तुमने अब तक नहीं बताया है।"

"एक फोटोग्राफर थे। वह दिल्ली-जयपुर हाइवे पर किसी खास कवरेज के लिए जा रहे थे। अचानक उनके सामने एक ट्रक और कार में टक्कर हो गई। कई लोग जख्मी हो गये। वे सभी दर्द के मारे कराह रहे थे।

फोटोग्राफर उन लोगों की मदद के लिए आगे बढ़े, लेकिन उनके साथ यात्र कर रहे पत्रकार ने उन्हें मना कर दिया। फोटोग्राफर को फोटो खींचने के लिए कहा, ताकि वे अपनी पेशेवर जिम्मेदारियाँ निभा सकें। वह भी उनकी बात मानकर, फोटो खींचने में मशगूल हो गए। काफी अच्छे फोटोग्राफ्स मिल गए, यह सोचकर वे दोनों खुश हो रहे थे। अपनी गाड़ी पर सवार होकर वे लोग चल पड़े। कुछ ही दूरी का सफर तय हुआ होगा कि उनकी कार पलटी खा गई। फोटोग्राफर का दाहिना हाथ पूरी तरह कुचल गया।

उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। हाथ का ऑपरेशन हुआ और उसमें रॉड डाली गई। कुछ दिन तक सब ठीक-ठाक चलता रहा, लेकिन फिर उन्हें असह्य पीड़ा शुरू हो गई। कुछ दिनों बाद उन्होंने दूसरे डॉक्टर्स के साथ कन्सल्ट किया। उन्हें हाथ में लगे रॉड को बदलने की सलाह दी गई। दूसरी बार उनकी रॉड बदली गई। पहले की ही तरह इस बार भी कुछ दिनों बाद उन्हें घोर पीड़ा होनी शुरू हो गई। कुछ दिनों में यह दर्द असह्य हो गया। फिर से उन्होंने डॉक्टर से हाथ का चेकअप कराया। डॉक्टर ने आपरेशन करने की सलाह दी। लेकिन उन्होंने इस बार ऑपरेशन नहीं कराया और पीड़ा से जूझते रहे। उनके हाथों में जान बाकी नहीं रह गई थी। एक तो हाथ की पीड़ा और दूसरा रोजगार खत्म होने की वजह से मानसिक पीड़ा। तुम समझ सकती हो उनके ऊपर दुख का पहाड़ टूट गया होगा। इतने दुख की कल्पना करने मात्र से ही रूह कांप जाती है। अब इसी से समझ सकती हो कि उस आदमी पर क्या गुजर रही होगी। फोटोग्राफर का जीवन किसी तरह गुजर रहा था कि एक दिन एक साईं बाबा के भक्त उनके पास आए। वे उनके दोस्त भी थे। उन्होंने उन्हें साईं बाबा के मंदिर चलने की सलाह दी। वे थोड़ी ना नुकूर के बाद उनके साथ चलने के लिए तैयार हो गए। कहते हैं कि कुछ दूर चलने के बाद अचानक उनके हाथ से रॉड खुद-ब-खुद फट कर निकल गया और सभी दर्द छू-मंतर हो गया।"

वीणा बोली, "वाकई यह तो चमत्कार है।"

"हाँ, यह बाबा का आशीर्वाद है। वे अपने भक्तों का हर प्रकार से ख्याल रखते हैं। यह वाकया सत्य में घटित हुआ है। जानती हो इस घटना के बाद से वे दिल्ली के लोधी रोड स्थित साईं बाबा के मंदिर हर वीरवार को जाने लगे। वे वहाँ ज़रूर जाते हैं, चाहे कुछ भी हो जाये। साई की महिमा अपरंपार है। पता नहीं किस रूप में और कब साईं बाबा लोगो का उद्धार कर दें, कोई नहीं जान सकता है।"

"आस्था और विज्ञान दोनों ज़रूरी है। लोग विज्ञान के पीछे भागते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि विज्ञान जहाँ खत्म होता है, वहीं आस्था शुरू होती है।"

"हाँ, तुम ठीक कहती हो। अब मैं भी इन चीजों पर विश्वास करने लगा हूँ, लेकिन लोगों को पोंगापंथी से ज़रूर बचना चाहिए।"

राधा ने सहमति जताई, "सच्चाई, अच्छाई, बुराई सबकुछ समय के साथ-साथ चलता रहता है। विवेकशील प्राणी को उनमें विभेद करना आना चाहिए।"

"हॉ, राधा मैं तुमसे सहमत हूँ। अक्सर सफलता मिलने के बाद हम स्वयं को सबसे शक्तिशाली मानने लगते हैं। जब बुरा समय आता है तो फिर से धरातल पर आ जाते हैं, जबकि हमें हमेशा दुख या सुख दोनों में समान भाव रखना चाहिए।"


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