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ISSN 2292-9754

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08.20.2014


43.
नया सवेरा
स्मिता, अमरेन्द्र

ऑफिस में आजकल मनीष को कुछ कम काम करना पड़ रहा है। मंत्री जी नहीं हैं और विजय बाबू भी शिरडी गए हुए हैं। पिछले दिनों उसने विजय बाबू को अपने विचारों से अवगत कराया था, जो विचार वर्षों से उसके मन में जमा थे। आजकल राधा के विचार और व्यवहार में जो बदलाव आ रहा है, उसे वह समझ नहीं पा रहा है। वह इस उघेड़बुन में रहता है कि आखिर राधा करना क्या चाहती है? काफी सोचने के बाद भी उसे वस्तुस्थिति का भान नहीं हो पाता है।

अब उसे अपनी घरेलू समस्याओं और जिम्मेदारियों का एहसास हो रहा है। वह अपनी बातों को अपने एक कलीग संजीव से शेयर करना चाह रहा है। हालांकि अपनी पत्नी के बारे में बातचीत करते हुए उसे संकोच हो रहा है। इसलिए वह उससे बात को घुमा-फिरा कर पूछ रहा है। क्या सभी महिलाएँ डिमांडिंग होती हैं? संजीव ने जवाब दिया- हाँ, होती है। उसने चुटकी लेते हुए पूछा- क्या आपकी मेम साहिबा ने कोई डिमांड किया है क्या?

मनीष ने टालते हुए कहा, "नही, ऐसी बात नहीं है। मैं केवल तुमसे जानकारी के लिए पूछ रहा हूँ। आज समाचारपत्र में पढ़ा था कि महिलाएँ गिफ्ट लेना बेहद पसंद करती हैं।"

गता है तुम्हें भी महिलाओं का पन्ना पढ़़ना अच्छा लगता है। ठीक है- उसे जारी रखो, उससे तुम काफी कुछ सीख जाओगे। दोस्त! मैं अपने दिल का हाल बयाँ करता हूँ। मेरी सारी कमाई बीबी की फरमाइश पूरी करने में ही खत्म हो जाती है।"

मनीष ने उत्सुकतावश पूछा, "कैसी फरमाइश होती है? तुम्हारी पत्नी किन चीजों की मांग अधिक करती है?"

"अरे यार क्या बताऊँ। सैलरी बाद में मिलती है, सामान की लिस्ट पहले पकड़ा दी जाती है। कभी सोफा-सेट, कभी ओवन, कभी म्यूजिक सिस्टम तो कभी सोने की अंगूठी इत्यादि इत्यादि। अभी पिछले महीने की ही बात है। मुझे लगा कि इस महीने कुछ नहीं खरीदना होगा। लेकिन महीना खत्म होने से पहले मुझे पूरे घर के लिए महंगा पर्दा लाना पड़ा। इसमें चार हज़ार रुपये खर्च हो गए। दरअसल, मेरी पत्नी किसी पड़ोसन के घर गई थी। वहाँ उसे उनके घर का पर्दा बहुत पसंद आ गया। उसने पर्दों के बारे में तमाम जानकारी हासिल कर वैसा ही पर्दा खरीद लिया। यार, कभी-कभी लगता है कि उसकी फरमाइश पूरी करते- करते मेरी उम्र गुजर जाएगी।

हाँ, मनीष तुम भी तो बताओ, तुमसे किस चीज की फरमाइश की गई है?"

मनीष ने टालने की कोशिश की, तो उसने कहा कि चलो अगर नहीं बताना चाहते हो, तो कोई बात नहीं है। लेकिन मैं तुम्हारी बातों से अनुमान लगा सकता हूँ। पिछले दो वर्षों में तुमने कभी-भी पहले इस विषय पर चर्चा नहीं की और न ही इसमें तुम्हारी कोई रुचि रहती थी।

"हाँ, यार यह सही है," मनीष बोला। जानते हो, अबतक मेरी पत्नी कुछ भी मांग नहीं करती थी, लेकिन इधर कुछ महीनों से उसमें कई तरह के बदलाव मैं देख रहा हूँ। बहुत दिनों से वह डीवीडी खरीदना चाह रही थी। कल जब मैं उसके साथ दुकान गया तो उसने डीवीडी नहीं खरीदा। अब वह कम्प्यूटर खरीदना चाह रही है।"

"क्या तुम्हारी पत्नी कम्प्यूटर खरीदना चाह रही है? क्या वह पढ़ी-लिखी है? तुम तो बताया करते थे कि वह अधिक पढ़ी-लिखी नहीं है।"

"हाँ यार, वह कम्प्यूटर खरीदने की जिद कर रही है। 12वीं कक्षा तक उसने पढ़ाई की है। उसकी शिक्षा-दीक्षा गाँव में हुई है। इधर कुछ दिनों से वह नौकरी करना चाह रही है। इसलिए वह कम्प्यूटर भी सीखना चाहती है।"

"यह तो बड़ी अच्छी बात है। तुम्हारी पत्नी नौकरी करना चाहती है और कम्प्यूटर खरीदने की बात कर रही है। बहुत कम महिलाओं का इस ओर रुझान होता है। पढ़ी-लिखी और लैपटॉप चलाने वाली महिलाओं को छोड़ दो, तो ज्यादातर को किचेन, श्रृंगार और गहना खरीदने में ही मन रमता है।"

मनीष को यह सब सुनकर लगा कि संजीव को महिलाओं के बारे में अच्छा ज्ञान है।

उसने उससे पूछा, "अच्छा तुम्हें यह सब कैसे मालूम हुआ"

संजीव, "देखो, तुम गाँव से आए हो, मैं दिल्ली का रहनेवाला हूँ। तुम लोगों को महिलाओं से बात करने में संकोच होता है। तुम एकदम पप्पू हो।"

मनीष, "क्या मतलब है तुम्हारा। तुम कहना क्या चाह रहे हो।"

"मैं यह कह रहा हूँ कि लोगों के बात-विचार पर परिवेश का भी प्रभाव पड़ता है। जिस तरह गाँव और शहर में रहने वाले लोगों की सोच अलग-अलग होती है, उसी तरह अलग-अलग महिलाओं के विचार और सोच अलग-अलग होती है। इसके आधार पर ही वे सामान की भी खरीदारी करती हैं। अब देखो- तुम्हारी पत्नी को कम्प्यूटर चाहिए, वह नौकरी करना चाहती है। लेकिन मेरी पत्नी, पता नहीं वह क्या चाहती है। अभी भी उसे सड़कों और बाजारों में मटरगस्ती करना खूब भाता है।"

"तुम क्या कह रहे हो संजीव।"

"हाँ, मनीष मैं अपनी पत्नी से बोलता रहता हूँ कि वह कोई नौकरी ढूंढ ले, लेकिन वह कहाँ सुनने वाली है। मैं ऑफिस चला आता हूँ और वह कहाँ-कहाँ जाती रहती है पता नहीं। जब मैं कुछ पूछता हूँ, तो यह कहकर मेरा मुंह बंद करा देती है- आई नीड ए पर्सनल स्पेस। मुझे अपने तरीके से जिंदगी जीना है। क्या करूँ दोस्त हाई-फाई लड़की से विवाह करने का यह नतीजा है। मैं एलडीसी की नौकरी करता हूँ, वह भी उसे पसंद नहीं है।"

"क्यों उसे पसंद नहीं है?"

"अरे यार। उसे पैसा चाहिए। इस नौकरी में कितना पैसा मिलता है, तुम जानते ही हो। वह तो मैं ही हूँ, जो किसी प्रकार उसकी इच्छाओं को पूरा कर रहा हूँ।"

"अच्छा, तुमने तो पहले कुछ बताया नहीं था।"

" क्या बताना यार, आज जब तुम हमसे खुलकर बातें कर रहे हो, तो मैं भी अपनी बात कहने लगा। वरना, यह सब किसी से बताने की चीज है क्या।"

"हाँ, तुम बिल्कुल सही कह रहे हो। घर की बातें घर में ही रहें, तो अच्छा है। मैं भी पहले तुमसे बात करने में संकोच कर रहा था।"

"हाँ, चलो कोई बात नहीं। अब हमलोगों ने बात करनी शुरू की है, तो आगे भी करेंगे।"
"हाँ, यार घर की जिम्मेदारियों से भी मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है। हम लोग आगे भी इस विषय पर बात करते रहेंगे, ताकि मन हल्का हो जाया करे।"


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