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ISSN 2292-9754

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08.20.2014


41.
नया सवेरा
स्मिता, अमरेन्द्र

राधा और मनीष दोनों आज डीवीडी खरीदने के लिए बाजार पहुँच चुके हैं। एक के बाद एक वे कई दुकानों का चक्कर लगा रहे हैं। जब राधा तकरीबन दस से भी अधिक दुकान घूम ली, तो मनीष ने राधा से यह पूछा, "क्या तुम्हें कोई पसंद आया?"

उसे किसी डी वी डी का कलर पसंद नहीं आ रहा था, तो किसी की साइज़ एवं शेप। वह फंक्शंस के बारे मे पूछताछ करती और उसे छोड़ दे रही थी।

मनीष को यह बात समझ नहीं आ रही थी कि आखिर कई दुकानों का वह चक्कर क्यों लगा रही है? जो लेना है, वह ले ले। चार ब्रांड ही तो आते हैं।

राधा को कोई डी वी डी पसंद नहीं आ रही थी। यह देखकर मनीष मन ही मन कह रहा था चलो कोई बात नहीं, पैसा बच गया। आगे से जब बाजार आने के बारे में कहेगी तो बोल देंगे कि जब तुम्हें पसंद ही नहीं आया, तो मैं क्या करूँ?

वहीं राधा के मन में दूसरी बातें चल रही थी। वह इसी बहाने कई बार बाजार आना चाहती थी। साथ ही वह अब डीवीडी की बजाए कम्प्यूटर खरीदना चाह रही है। दरअसल, वह पड़ोसन रानी की बेटी के साथ काफी घुल-मिल गई थी। राधा की उम्र 24-25 वर्ष थी, तो पूनम की उम्र 15 वर्ष थी। वहीं रानी की उम्र 35 थी। दोनों की उम्र में बहुत अधिक अंतर न होने के कारण तालमेल अच्छा बैठता था। पूनम ये हुई बात उसके मानस-पटल पर एक-एक का उभरने लगे।

पूनम ने राधा से पूछा कि क्या आप जानती हैं कि किसी क्षेत्र में सफलता कैसे मिलती है?

राधा ने सहज भाव से उत्तर दिया - ज्ञान से। पढ़ने से हमारा ज्ञान बढ़ता है और हमें नौकरी मिलती है। पूनम ने टोका।

"नहीं, यह सौ प्रतिशत सही नहीं है। दिल्ली में ऐसा नहीं है। राधा आँटी, मेरे सर बता रहे थे कि अब समय बदल रहा है। हमें यदि सफल होना है यानी नौकरी पानी है तो थ्री सी यानी कॉन्फिडेंस, कम्युनिकेशन और कम्प्यूटर ज़रूरी है।

अब पहले वाली बात नहीं रह गई है कि आप इतिहास, विज्ञान पढें और आपको नौकरी मिल जाएगी। देखिए, आंटी समय बदल गया है। आप इंजीनियर, डॉक्टर या आई ए एस तो बन नहीं सकती। फिर भी आप यदि नौकरी पाना चाहती हैं, तो कई अवसर मौजूद हैं। हमें आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखना आना चाहिए। कम्प्यूटर का ज्ञान भी ज़रूरी है।"

राधा ने तुरंत पूछा तो क्या उसे नौकरी पाने के लिए कम्प्यूटर चलाना सीखना होगा?

पूनम ने कहा हाँ, सौ प्रतिशत। तब से उसके मन में कम्प्यूटर लेने की इच्छा होने लगी। उसने अंग्रेजी पढ़ना बहुत पहले ही शुरू कर दिया था। बहुत कम समय में वह लिखने और समझने में रानी से बहुत आगे निकल चुकी थी, लेकिन बोलने में उसे दिक्कत होती थी।

रानी ट्यूशन लेती थी। वहीं राधा इंगलिश स्कूलों में अंग्रेजी की जो किताबें पढ़ाई जाती हैं, उन्हें खरीदकर ले आई थी। इसे वह पूनम के साथ बैठकर पढ़ती थी, जिससे उसे काफी लाभ मिल रहा था।

राधा अब नौकरी करने का मन पूरी तरह बना चुकी थी। अंग्रेजी का ज्ञान उसे थोड़ा-बहुत हो चुका था। लिहाजा वह अब कम्प्यूटर खरीदना चाह रही थी। वह अब दिल्ली के सड़कों, बाजारों को पहचानना और अलग-अलग लोगों से मिलना चाहती थी। उन्हें समझने की कोशिश कर रही थी, ताकि नौकरी करने निकले तो परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।

मनीष को भी कोई ऐतराज नहीं है उसके नौकरी करने से।

राधा अपना सारा ध्यान नौकरी पाने पर लगा रही थी। वह सोचती है कि आज के समय में मनीष की तनख्वाह सही ढंग से गुजारा करने के लिए काफी नहीं है। फिर भी वह इन सभी बातों पर चर्चा नहीं करना चाहती है। वह पहले आत्मनिर्भर बनना चाहती है।

इसका कितना दाम है? क्या इस

वह मनीष से कहती है - मनीष, अब हम कम्प्यूटर लेंगे, डीवीडी की कोई ज़रूरत नहीं है। चलो अब चलते हैं। ऐसा कहकर दोनों बाहर निकल जाते हैं। मनीष कुछ हद तक खुश है लेकिन साथ ही उसे चिंता भी सताने लगी कि कहीं कम्प्यूटर न खरीदना पड़े। लेकिन अभी पैसे बच जाने की वजह से वह संतुष्ट है।


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