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ISSN 2292-9754

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07.26.2014


39.
नया सवेरा
स्मिता, अमरेन्द्र

विजय के पास अरुण गया था देश के विकास के बारे में बात करने, लेकिन ज्यादातर बातें राजनीति पर ही हुईं, विकास की कम। उसमें भी अधिक समय तक विजय ही बोलता रहा। अरुण को बोलने का मौका कम ही मिल पाया। वह केवल श्रोता बना रहा।

"हमारे देश के ज्यादातर लोग खुद को सभी चीज का जानकार मानते हैं और किसी विषय पर थोड़ी भी चर्चा चलने पर अपना ज्ञान भंडार खोलने में देरी नहीं करते हैं। बाबुओं में खासकर यह गुण और अधिक होता है। वे खुद को हर क्षेत्र का महारथी मानते हैं। यही दिक्कत है। क्या भाजपा में शीर्ष नेतृत्व के पास कम दिमाग है? क्या पार्टी की स्थिति पर वे सोच- विचार नहीं कर रहे होंगे।" अरुण ने ये बातें अपने दोस्त वरुण से कहीं।

"ठीक ही एक आईएएस ने कहा था, ’आई ए एस का मतलब आई एम सुप्रीम’ होता है। यानी जनता के सामने आई एम सुप्रीम और नेताओं के सामने आई एग्री सर। यह मुहाबरा बिल्कुल सटीक बैठता है हमारे देश के बाबुओं पर। वह अपने सामने किसी को कुछ समझते ही नहीं है। यहाँ तक कि कभी-कभी तो वे अपनों को भी नहीं छोड़ते हैं।"

वरुण ने भी हाँ में हाँ मिलाया। उसने कहा - "मैं एक दिलचस्प वाकया बताता हूँ इसका। एक आई ए एस ने दूसरे आई ए एस को फोन किया अपना काम कराने के लिए।"

"हेलो, मैं मिश्रा बोल रहा हूँ, आई एम एन आईएएस।"

तो उधर से आवाज आती है कि तो क्या हुआ आईएएस तो मेरे घर में खाना बनाती है। उसे यह जबाब बहुत ही खराब लगा। हालांकि मिश्रा का काम तो हो गया लेकिन उसका मन में यह बात चुभ गई किसी आईएएस की कोई इतनी तौहीन कैसे कर सकता है! हाँलाकि उसने आईएएस की तौहीन नहीं की थी। उसने बिल्कुल सही कहा था। दरअसल, उसकी पत्नी भी आईएएस थी। अरुण ने कहा देखो बाबुओं में काफी यूनिटी होती है मेरा मतलब केवल आईएएस से नहीं है बल्कि सचिवालय के सभी कर्मचारियों से भी है।

वरुण ने इस बात को स्वीकार किया और कहा आप बिल्कुल सच बयान कर रहे हैं। उन लोगों का कोई भी काम रुकता नहीं है। नेताओं और बाबुओं का गठजोड़ तो रहता ही है। नेता किसी भी पार्टी का क्यों न हो, वह बाबुओं से ज़रूर संबंध बना कर रखता है।

"अरुण, जानते हो बहुत हद तक नेताओं की सफलता भी बाबू ही तय करते हैं। लालू यादव ने जब बिहार में बाबुओं को परेशान करना शुरू किया तो उन्हें सत्ता गंवानी पड़ी। जब रेल मंत्रलय को संभालने का उन्हें मौका मिला तो उन्होंने पिछली गलती से सबक लिया। वे फिर से बाबुओं की शरण में चले गए तो उन्हें सफलता ही सफलता मिलती गई। आजकल मायावती बाबुओं के साथ खराब व्यवहार कर रही है, इसे भी जाना होगा। हम तुम्हें बता देते हैं।"

"वरूण तुम आज बाबुओं के पीछे हाथ धोकर क्यों पड़े हो?"

"नहीं यार! वैसी कोई बात नहीं है। मैं रविवार को विजय के पास गया था। उसने मुझे फोन किया था। वह देश के विकास की रूपरेखा कैसी हो, इस विषय पर चर्चा करना चाहता था। इस पर चर्चा करना तो दूर वह राजनीति की ही बात करता रहा।"

"अच्छा यह बात है। नाराज क्यों होते हो, तुम भी तो उन्हीं लोगों की मदद से मीडिया में छाए रहते हो। और अपना धंधा भी चला रहे हो।"

"छोड़ो अरुण, तुम मुझमें ही दोष देख रहे हो। बड़ी मछली को देखोगे तो आँख फटी की फटी रह जाएगी।"

"क्या मतलब, क्या बोल रहे हो वरुण जानते हो।"

"हाँ मैं सही कह रहा हूँ, मैं कई ऐसे लोगों को जानता हूँ। कुछ एनजीओ तो ऐसा गोरखधंधा चला रहे हैं कि पूछो मत। एनजीओ के आदमी इस तलाश में लगे रहते हैं कि आईएएस लोग रिटायर करें और वे उन्हें अपने यहाँ जॉब पर रख लें। इसमें कई कामयाब भी होते हैं। आईएएस जिनकी पूरी जिन्दगी दूसरों पर रोब झाड़ने में बीतती है, बाद में वे अनपढ़ चेयरमैन की अगुवानी के लिए माला पकड़े घंटों इंतजार करते रहते हैं। तुम्हें क्या बताऊँ, एक मेरे जानने वाले ने कुछ इसी तरह अपनी दुकान चलाई। आज उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है। रिटायरमेंट के बाद आईएएस को सरकार की ओर से दी जानेवाली सभी सुविधाएँ खत्म हो जाती हैं। एन जी ओ से जुड़ने के बाद पैसा और प्रतिष्ठा दोनों मिलता है। पैसे की कमाई जिस तरह भी हो, वे उसी में मगन रहना चाहते हैं। यह तो छोटे आईएएस की बात है जो अपने करियर में सेक्रेटरी या चीफ सेक्रेटरी भी नहीं बन पाते हैं। बड़े आईएएस तो बड़ी छलांग लगाते हैं। कोई गवर्नर बन जाता है, तो कोई बोर्ड या कॉरपोरेशन का चेयरमैन। यह ऐसा खेल है, जिसे आम आदमी नहीं समझ सकता है। नेता आइ ए एस ऑफिसर के लालच को अच्छी तरह समझते हैं। इसलिए वे ऑफिसर्स को अपनी उंगली पर नचाते रहते हैं और वे लोग नाचते रहते हैं। बड़ी विचित्र स्थिति है। अगर देश के विकास के बारे में सोचना होगा तो पूरे सिस्टम के बारे में सोचना होगा। जिस प्रकार गूगल, माइक्रोसॉफ्ट हमेशा कम्प्यूटर सिस्टम को अपग्रेड करते रहते हैं उसी तरह नौकरशाही व्यवस्था को भी हमेशा समाज की बदलती ज़रूरत व समय की मांग के अनुसार अपडेट और अपग्रेड करने की ज़रूरत है।


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