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ISSN 2292-9754

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07.15.2014


25.
नया सवेरा
स्मिता, अमरेन्द्र

विजय के जाने के बाद मंटू नेताओं से मिलने चला गया। मंटू अब तक अपने जीजा जी यानी मंत्री जी के संसदीय क्षेत्र एवं राज्य तक ही सीमित था। उसने काफी मेहनत और समझ से राज्य में पार्टी की स्थिति सुधारने में जीजा जी की मदद की थी। जीजा जी दिल्ली में मंत्री बनेंगे इसकी उसे उम्मीद नहीं थी। लेकिन पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को संदेश देना चाहती थी कि संगठन के लिए काम करनेवालों को नजरअंदाज नहीं किया जायेगा इसलिए उन्हें सरकार में जगह मिली है।

मंटू संगठन के क्रिया कलापों से बखूबी परिचित था। उसने जब विजय से सरकार की बारीकियों के बारे में बात की तो उसे पता चला कि सरकार और संगठन की ज़रूरतें अलग-अलग हैं। जो संगठन में अच्छा काम माना जाएगा, यह ज़रूरी नहीं है कि वह सरकार में भी ठीक हो। आज मंटू के दिमाग में यह विचार प्राथमिकता से घूम रहा था।

मंटू सरकार की बारीकियों को समझने की कोशिश कर रहा है। संगठन चलाने के लिये संघर्ष, संवेदनशील और सहनशक्ति की ज़रूरत होती है। वहीं सरकार चलाने के लिए प्रशासनिक क्षमता और दूरदर्शिता होनी चाहिए। क्यों अक्सर संगठन में सफल व्यक्ति सरकार में सफल नहीं होते हैं? इसकी क्या वजह है? किस प्रकार का कदम उठाना चाहिए, ताकि वाहवाही भी मिले और लोगों की भलाई भी हो। मंटू के दिमाग में ये सभी प्रश्न घूम रहे थे।

वह सोचने लगा कि किस प्रकार पीएस की तलाश की जाए। अब तक दो-तीन नामों पर सहमति लगभग बन चुकी थी। उनमें से एक थे अपने सगे संबंधी आईएएस जिनका कैडर था तमिलनाडु। दूसरा असम कैडर के आईएएस का सिफारिश दल के बड़े नेता ने किया था और तीसरा अपने गृह प्रदेश के ही आईएएस थे जिन्होंने मंत्री जी की काफी मदद की थी। और चौथे ने अपने व्यवहार और दरबारी प्रवृत्ति के कारण सोचने पर मजबूर कर दिए थे।

मंटू अब तक मंत्री जी के इन कामों में हस्तक्षेप नहीं किया था, लेकिन वह इस पर रणनीति बनाने लगा।

जीजा जी को समय कहाँ है। जब से मंत्री बने हैं, वह तो बाहर ही बाहर घूम रहे हैं आज यहाँ, कल वहाँ। आखिर वह भी ज़रूरी है। राजनीति में यह सब करना ज़रूरी होता है। अब हम लोगों को कुछ करना होगा। वह भी सावधानीपूर्वक। अभी एक बार सावधानी बरती गई तो ठीक रहेगा, वरना बाद में पछताना पड़ेगा। यह तो संयोग था कि मैं आज दिल्ली आ गया। वरना कोई न कोई उन्हें पटा लेता और वह मान जाते।

विजय जी आदमी ठीक लगते हैं। उनसे मुझे इस बात पर विशेष चर्चा करनी चाहिए। हाँ, और मैं जल्द ही दिल्ली का कार्यक्रम बनाऊँगा तब जाकर यह सब फैसला होगा।


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