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ISSN 2292-9754

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07.15.2014


22.
नया सवेरा
स्मिता, अमरेन्द्र

विकास को एयरपोर्ट से विदा करने के बाद विजय सीधा ऑफिस मे आकर काम निपटाने लगा। आज न सिर्फ उसे अपनी रोजमर्रा की फाइलें निपटानी हैं, बल्कि कल मंत्री जी आ रहे हैं, उसके लिए भी सभी काम को व्यवस्थित करना है। साथ ही, कैसे अपनी बात को उनके सामने रखें, यह विचार भी दिमाग में घूम रहा है।

करीब 2 बजे, कुछ काम का बोझ कम हुआ तो उसने सबसे पहले अरुण को फोन किया। अरुण समाजसेवी संस्था में काम करता है और गाँवों-कस्बों में जाता रहता है। सरकार के बारे में लोग किस प्रकार सोचते हैं यह जानने में वह काफी मददगार साबित होगा। अरुण ने विजय का फोन तो उठाया लेकिन वह व्यस्त था इस कारण पूरी बात नहीं कर सका। वह रविवार को उसके घर आएगा, यह कहकर फोन उसने रख दिया।

विजय के पास अब तक काफी मैटर जमा हो गया था। समस्या थी उसे मंत्री जी के सामने किस प्रकार प्रस्तुत किया जाए? वह यह सब सोच ही रहा था कि मंत्री जी के पीए का फोन आ गया। उसने कहा कि मंत्री जी के साले साहेब आज दिल्ली आ रहे हैं। उनके रहने का अच्छा इंतजाम करना है। आप समझ रहे हैं .......सरकारी भवन में रहना ठीक नहीं है।

विजय के पास पहली बार इस तरह का मौका आया कि वह नए मंत्री के सगे-संबंधियों के लिए कुछ करे। लिहाजा उसने तुरंत हाँ कर दी। दरअसल, विजय काफी पहले से इस प्रकार का काम करते आ रहा था, उसके लिए यह बड़ी बात नहीं थी। लेकिन आज इस काम में वह अपने लिए अवसर तलाशने लगा। उसने सोचा कि बाकी के सभी ऑफिसर्स जो पिछले मंत्री के साथ थे, कहीं न कहीं फिट हो गए हैं। क्यों न वह सीधे मंत्री जी से बात करने की बजाय उनके सालेसाहब से ही बात करे। उसने तुरंत फोन उठाया और उसके बारे में डिटेल्स पीए से पूछा।

पीए ने उनके आने का समय पाँच बजे बताया। विजय ने कहा - ठीक है। उन्हें रिसीव करना ही होगा। जैसा कि आप बता रहे थे-अधिक लोगों के बीच उनके बारे में चर्चा करना ठीक नहीं है। क्यों न हम अपनी गाड़ी से ही उनको रिसीव कर लें। बढिया होटल में ठहरने का प्रबंध कर दें।

"हाँ, यह आइडिया अच्छा है।" पीए ने कहा।

विजय मन ही मन मुस्कुराया, क्योंकि वह जैसा सोच रहा था, वैसा ही हो रहा था। उसने सोचा कि मनीष को बुलाऊँ, लेकिन फिर कहा-नहीं। यह ठीक नहीं है। मनीष ने तो अपनी बात बता दी है। बाकी हम संभाल लेंगे। आज देखते हैं सालेसाहब से मिलकर। फिर कल सोचेंगे कि आगे क्या करना है? हर बात सब को बताना ठीक नहीं है। हमें भी कुछ करना चाहिए। चलो जो बचा हुआ काम है फटाफट निपटा लें। काफी काम काम करना है। एक भी फाइल का काम बाकी नहीं रहना चाहिए। हम करें भी तो क्या करें, हम अकेले ही हैं, पहले इसी काम को निपटाने के लिए कई लोगों की टीम थी।


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