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ISSN 2292-9754

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07.06.2014


15,
नया सवेरा
स्मिता, अमरेन्द्र

विजय समय से पहले ही ऑफिस पहुँच चुका था। सुबह 9 बजे वह अपनी सीट पर था। अन्य कर्मचारी अभी तक नहीं आये थे। वह अपने कम्प्यूटर पर अकेले आधे घंटे तक काम करता रहा। 9.30 पर उसका अर्दली पहुँचा। विजय ने उसे पहुँचते ही मनीष को बुलाने के लिए कहा। वह मनीष को बुलाने गया, लेकिन वह अभी ऑफिस नहीं पहुँचा था। दस मिनट के बाद फिर उसे बुलाने को कहा, लेकिन वह अभी भी नहीं पहुँचा था।

आज मनीष से बातचीत करने के लिए विजय व्याकुल हो रहा था। कई-बार अर्दली का एक ही जवाब सुन, विजय खुद ही मनीष को देखने चल पड़ा। मनीष को अपनी सीट पर न पाकर हताश हो वह लौटकर अपनी सीट पर बैठ गया। उसने अपने अर्दली को यह निर्देश दिया कि मनीष आए तो फौरन उसे बुलाकर ले आए।

मनीष 11.20 पर ऑफिस पहुँचा। जैसे ही उसे विजय का संदेश मिला, वह भागा-भागा उनके पास आ गया। रास्ते भर वह डरता रहा। वह यह सोचते-सोचते आ रहा था कि आजकल उसका समय खराब चल रहा है। पता नहीं उससे क्या गलती हो गई जो इतनी व्यग्रता से उसे तलाश रहे हैं?

डरते हुए वह विजय की केबिन में प्रवेश किया। विजय ने देखते ही उसे झड़प लगानी शुरू कर दी। उसके झड़प में तीव्रता नहीं थी, मनीष ने यह भांप लिया।

मनीष बोला, "सर बस में कुछ दिक्कत आ गई थी। इसलिए देर हो गई।"

विजय, "ओके ओके, ठीक है, ठीक है। जाओ जाकर पहले फ्रेश हो लो, फिर यहाँ आना, तुमसे कुछ ज़रूरी बातें करनी हैं।"

"ठीक है सर," मनीष यह कहते हुए बाहर निकल गया। अभी 10 मिनट भी नहीं हुए थे कि विजय ने फिर से मनीष को बुलवा लिया।

"हाँ, मनीष बैठो।" मनीष के आते ही विजय ने कहा।

मनीष कुर्सी पीछे खींचकर उसके सामने बैठ गया। वह बैठ ही रहा था कि विजय ने एक पर एक कई प्रश्न कर दिए। दरअसल उसके मन में कई तरह की बातें उमड़-घुमड़ रही थीं।

मनीष कुछ उत्तर देता इससे पहले विजय ने टोका। "नो, नो आन्सर वन बाय वन। सबसे पहले यह बताओ.... टेल मी। क्या तुम उस लड़के को..... जो एक दिन यहाँ जॉब के लिए आया था उसके बारे में कुछ जानते हो? तुम्हारे पास उसका पता, फोन नम्बर आदि है? उससे देश के विकास संबंधित कई प्रश्न पूछने थे।"

मनीष समझ नहीं रहा था कि आखिर बात क्या है? इन सारी बातों को सर मुझसे क्यों कह रहे हैं।

 पर बहुत भरोसा करता हूँ। तुम्हें जीवन में बहुत कुछ करना है। हम तुम्हारे बारे में कुछ विशेष सोच रहे हैं। आगे क्या करना है हम सोचेंगे। ठीक है अभी तुम जाओ, उस लड़के के बारे में पता करो। साथ ही, यह भी सोचो देश का विकास किस प्रकार हो?"

मनीष अपनी सीट पर बैठकर सोचने लगा कि बात क्या है, विजय सर ने ये सभी बातें उससे क्यों की। उन्हें आखिर क्या चाहिए?

वहीं विजय अपने कम्प्यूटर से सामान्य जानकारी इकट्ठा करने में जुट गया। बहुत सारे मैटर्स मिल गए। उसने राहत की सांस ली। उसे अपनी तरह से मंत्रीजी के सामने पेश करने के बारे में सोचने लगा। वह एक एक लाइन लिखता और काट देता। असल में उसकी लिखने की आदत छूट गई थी। उसके विचार ठोस रूप नहीं ले पा रहे थे। निराश हो उसने फिर किसी से बात करने की सोची।

लिहाजा उसने मनीष को फिर से बुलाया।


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