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ISSN 2292-9754

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07.01.2014


09,
नया सवेरा
स्मिता, अमरेन्द्र

मंत्री जी से बातचीत के बाद विजय ने सीधे घर की ओर रुख कर लिया। आधे घंटे में वह घर पहुँचा और जो बातें मंत्री जी के साथ हुई थी उन्हें फिर से याद करने लगा। अब तक तीन मंत्रियों के साथ वह काम कर चुका था। लेकिन इतनी खरी-खरी बात करनेवाले मंत्री से उसकी मुलाकात पहली बार हुई थी।

"अपना आईडियाज लिख कर हमें दें," मंत्री जी ने साफ तौर पर विजय से कहा था। यह बात उसके मन में लगातार घूम रही थी। उसे अब उन लोगों की तलाश है, जिनकी पहुँच कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं तक है, जो उसकी पैरवी कर सकें।

साथ ही, विजय ने सोचा कि अब उसे बुद्धिजीवियों की भी तलाश करनी होगी, जो उसे रिपोर्ट तैयार करने में मदद करे। बहुत कोशिश करने पर भी उसके दिमाग में ऐसे लोगों को नाम याद नहीं आ रहा था। दरअसल, आठ साल में उसने ऐसे लोगों को प्रमुखता दी थी, जो सीधे पैसे के बार में बात करते थे। आइडियाज की बात करने वालों के लिए विजय के पास एक वाक्य था – कम टू दी प्वाइंट और इस पर चर्चा बाद में करेंगे। लेकिन, वह समय कभी नहीं आता था। उनलोगों से उनका नाम पूछना भी उसे गंवारा नहीं था। उनकी संगति करना तो दूर की बात।

अचानक उसे कुछ याद आया। हाल ही में एक लड़का जॉब मांगने के लिए उसे पास आया था। वह उसके गृह प्रवेश बिहार का था और उसके श्वसुर जी की सिफारिश लेकर आया था। इसलिए, उसने उससे दो चार बातें कर ली थीं, क्योंकि ऐसा करना ज़रूरी था। विजय ने उससे बिहार के विकास के बारे में बातों ही बातों में कहा नीतीश कुमार तो बिहार में अच्छा काम कर रहे हैं ... उन्होंने काफी सड़कें बनवाई हैं। ... लगता है कि बिहार अब सही राह पर आ जाएगा...।

लड़के के सामने धर्मसंकट था। यूपीए सरकार में मंत्री के साथ काम करने वाला अधिकारी नीतीश कुमार की प्रशंसा करें, इसकी उसे अपेक्षा नहीं थी। उसने सोचा कि शायद यहाँ उसकी परीक्षा ली जा रही है। उसने नीतीश कुमार की बुराई करने में ही अपनी भलाई समझी।

उसने तुरंत कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। यह मात्र दिखावा है। पिछले ढाई वर्ष से बिहार में कई सड़क पर निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन अबतक पूर्ण नहीं हो सका है। नीतीश कुमार केवल लोगों की आँखों में धूल झों रहे हैं। लॉ ऐंड ऑर्डर के बारे में कहा जा रहा है कि ठीक हो गया है, वह भी सही नहीं हुआ है। अभी हाल ही में पटना में दिन-दहाड़े किसी व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। अपहरण का सिलसिला थमा नहीं है। इसे क्या कहा जाएगा? मीडियावालों ने नीतीश के काम को हाइलाइट किए हुए है, वरना स्थिति बेहतर नहीं हुई है। विजय को संतुष्ट नहीं देख, उस लड़के ने तुरंत अपना पैतरा बदला और उसे मनाने की कोशिश करने लगा। वह ग्रेजुएट था और मास कॉम में उसने डिग्री हासिल की थी। वह बातचीत में होशियार था। उसने छूटते ही कहा, "देखिए विकास समय और परिस्थिति के सापेक्ष होना चाहिए। बगैर इसके विकास बेमानी है।"

"आप जानते हैं कि हम इक्कीसवीं शताब्दी में हैं, तो विकास भी इक्कीसवीं सदी के जैसा ही होना चाहिए। क्या रोड बनवाना इक्कसवीं सदी का काम है?आज दुनिया फास्ट हो गई है, आप तो दिल्ली में रहते हैं। देखिए मेट्रो ने किस प्रकार दिल्ली की जिंदगी में तेजी ला दी है। नया आयाम जोड़ दिया है। लोग आराम से मेट्रो में सैर कर रहे हैं। ऑफिस जा रहे हैं। देश के अन्य शहरों में भी इसके विस्तार की योजना बन रही है।

"बंगलौर और मुंबई में पहले ही इसकी मंजूरी मिल गई है। क्या बिहार में ऐसा करना संभव नहीं है? मेट्रो वहाँ भी लाई जा सकती है। अगर गंगा नदी के किनारे पटना सिटी से दानापुर को मेट्रो लाइन से जोड़ दिया जाए तो पूरे पटना को आधे घंटा में तय किया जा सकता है। लोगों को अशोक राजपथ पर जाम से राहत मिल सकती है।

"खैर ये तो पटना की बात हुई। अगर पूरे बिहार को रिंग रेलवे से जोड़ दिया जाए तो बिहार की तकदीर ही बदल जाएगी। उत्तर दक्षिण, पूर्व-पश्चिम सभी को दो घंटे में तय किया जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। बिहार में आई आई टी की स्थापना मनेर के आसपास किया गया है, वहाँ कच्ची सड़कें हैं। दरअसल, बिहार में अविकास एक अवसर था। हम मेट्रो रिंग बनाते और इसके आसपास कई नए टाउनशीप विकसित करते जिसमें अवासीय कॉलानी के अलावा कॉलेज, हॉस्पिटल, स्कूल का निर्माण करते। आदर्श बिहार की कल्पना साकार होती।" आदि-आदि लड़का बोलता चला गया और विजय सुनता गया। लड़के की बातों में एक अद्भुत आकर्षण था। विजय न चाहते हुए भी उसकी बातों को सुनता गया। परंतु उसने उसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। विकास का मतलब उसके लिए सिर्फ व सिर्फ अपना विकास करना था। कैसे दिल्ली में घर बनाया जाए, लड़के को अच्छे स्कूल में एडमिशन कराया जाय और पैसा बनाया जाय। लिहाजा उसने उसका एड्रेस और फोन लिखना तो दूर उसका नाम पूछना भी उचित नहीं समझा था।


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