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ISSN 2292-9754

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07.01.2014


02.
नया सवेरा
स्मिता, अमरेन्द्र

 विजय आज ऑफिस से जल्दी निकल पड़ा, क्योंकि उसका दोस्त पुणे से आनेवाला था। वह दोस्त को लेने के लिए सीधा एयरपोर्ट पहुँच गया। वह शाम 7.45 बजे पहुँचने वाली फ्लाइट की प्रतीक्षा कर रहा था कि अनाउंसमेंट सुनाई पड़ा.... पुणे से चलकर दिल्ली आने वाली फ्लाइट ठीक समय पर पहुँच चुकी है।

वह अपने दोस्त विकास को रीसीव करने के लिए निकास द्वार पर पहुँच गया। विकास जब बाहर निकला तो दोनों की मुलाकात हुई। वे दोनों आपस में बातें करते हुए गाड़ी पार्किंग की ओर चल पड़े। इसी बीच कुछ क्षण के लिए अंधेरा छा गया लेकिन फिर से वही दुधिया सफेदी जगमगा उठी।

‘क्या अमरीका में बिजली जाती है?’ मनीष का पूछा यह प्रश्न विजय को अचानक याद आया और उसने यही प्रश्न विकास से पूछ लिया। विकास ने कहा, "क्या बात करते हो, क्या यह संभव है? अमरीका विकसित देश है, सबसे ताकतवर देश है, वहाँ ऐसा नहीं हो सकता है। वहाँ की व्यवस्था काफी अच्छी है।"

विकास की यह बात विजय को सुनने में थोड़ी अटपटी लगी। विजय ने तुरंत सवाल किया कि क्यों कौन सी ऐसी बात है जिससे तुम कह रहे हो कि वहाँ व्यवस्था अच्छी है।

विकास अभी इस पर चर्चा नहीं करना चाहता था। उसने यह कहकर टाल दिया कि चलो घर चलकर इस संबंध में बातें करेंगे। अभी हम दूसरी बातें करें और दोनों आपस में अपने-अपने अनुभव बाँटने लगे।

विजय और विकास दोनों ने स्कूल में साथ-साथ पढ़ाई की थी। कॉलेज में भी साथ-साथ पढ़े थे। यहाँ तक कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी साथ-साथ की थी। उनकी सोच एक जैसी थी। दोनों देश के लिए कुछ करने की इच्छा रखते थे। वे पढ़ाई के दौरान अक्सर देश के विकास की बातें किया करते थे।

घर पहुँचकर दोनों को तैयार होते होते 9 बज गये। उसके बाद दोनों ने इधर-उधर की बातें आरम्भ की। यह सब चल ही रहा था कि एक बार फिर विजय ने अमरीका में बिजली जाती है या नहीं विषय पर चर्चा शुरू कर दी। विकास इस बात को फिर से टालना चाहता था। उसने पूछा कि तुम अमरीका के बारे में जानने के लिए क्यों इतना उत्सुक हो? दरअसल, आजकल विकास को अमरीका अच्छा लगने लगा था। वह पुणे शहर में उन युवकों के साथ रहता था, जो अपना भविष्य संवारने के लिए विदेश को अच्छा विकल्प मानते थे। खासकर अमरीका के प्रति उन लोगों का कुछ ज्यादा ही आकर्षण था।

विकास के कई ऐसे दोस्त थे, जो अमरीका की ओर पहले ही रुख कर चुके थे। उनसे बातें करने से उसे ऐसा महसूस होने लगा था कि वह बेकार में भारत की कंपनी में काम कर अपना समय बर्बाद कर रहा है। उसे भी किसी अमरीका की ही कंपनी में काम ढूँढ लेना चाहिए। वह अपनी सफलता के उड़ान की अगली मंजिल अमरीका को बनाना चाहता था। लिहाजा, विकास ने विजय से कहा कि उसे अमरीका में बिजली जाने के बारे में ठीक-ठाक पता नहीं है, लेकिन इतना अवश्य जानता है कि भारत जैसी बदतर स्थिति वहाँ नहीं होगी। अभी वह अपनी बात खत्म भी नहीं कर पाया था कि विजय फिर से अमरीका

की अच्छी व्यवस्था वाली बात पर कूद पड़ा।

"अमरीका की व्यवस्था किस तरह अच्छी है?"

विकास ने कहा, "अमरीका में सभी चीजें प्राइवेट है, इसलिए अच्छा तो होना ही है। तुम्हीं तो अक्सर कहते हो कि यहाँ के सरकारी कामों में ढिलाई ज्यादा है। यहाँ कोई काम करना नहीं चाहता है। वेतन कम है। लोगों को योग्यता के अनुसार न तो काम और न ही पैसा मिलता है।"

विकास ने उन्हीं सब बातों को दोहराया जो पहले अक्सर विजय कहा करता था। विजय एक सरकारी पब्लिक अंडरटेकिंग में काम करता था। उसका वेतन पहले कम था लेकिन अब उसे अच्छा नहीं तो निराशाजनक भी नहीं कहा जा सकता है। वह छठे पे कमीशन के बाद खुश है, साथ ही उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव भी हैं।

विकास ने आगे कहा, "हाँ, विजय तुम ये बातें हमसे क्यों कर रहे हो? तुम तो खुद एनटीपीसी के एक अधिकारी हो। यह अलग बात है कि जोड़-तोड़ कर पिछले आठ साल से मंत्री जी के साथ लग चुके हो। क्या आजकल तुम पढ़ाई-लिखाई न के बराबर कर रहे हो? लगता है केवल पैसा बनाने पर पूरा ध्यान है, मैंने सुना है कि तुमने दिल्ली के पॉश इलाके में मकान भी खरीद लिया है।

"क्या बात है? पहले तुम तो अपने गाँव में बिजली लाने की बात खूब किया करते थे!"


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