मिथिलेश
अभि. सुरेन्द्र सौरभ


मधुर मंगला चरण

प्रथम सर्जन सर्ग
(छन्द-ताटंक)

1 - 20
21 - 40

41 - 60
61 - 80
81 - 100
101 - 120
101 - 120

द्वितीय दर्शन सर्ग
(छन्द-सार)

1 - 20
21 - 40
41 - 60
61 - 83