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05.17.2009
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कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात

गीत
डॉ. अनिल चड्डा


धरती की वादियों में नारे कई बुलंद हों,
ऐसी लगा अग्न चारों दिशा प्रचंड हो!

हिम्मत जो न तू हारे, खुद रास्ते नमन हों,
उजड़े हुए गुलिस्तां चुटकियों में चमन हों !

नदियाँ अपना रास्ता खुद ही बनाये जाती हैं,
पहाड़ हो या पेड़ हो, सबको मिटाये जाती हैं!

मन हार के न हार तू ज़िंदगी की भावना,
मोड़ अपने रास्ते, तू पूरी करले कामना!

चल उठ बुला रही हैं तुझको ज़िंदगी की वादियां,
चाहे हँसी, चाहे कठिन, बना इन पे अपना हाशिया!


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