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05.17.2009
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कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात

वादा पक्का मेरा!
डॉ. अनिल चड्डा


तुझसे वादा निभे न निभे ज़िन्दगी,
मौत, तुझसे है वादा पक्का मेरा।

दोस्त न हो, न हो कोई भी हमसफ़र,
कट जायेगा सफ़र रफ़्ता-रफ़्ता मेरा।

न हँसो तुम हमार लिये, न सही,
तुमको खलता है क्यों पर हँसना मेरा।

शाम ढलती रही, सुबह होती रही,
वक़्त कटता रहा यूँ ही तन्हा मेरा।

बात से बात यूँ ही निकलती गई,
तुमसे पहले तो न था रिश्ता मेरा।


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