अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
05.17.2009
003
कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात

क्यों
डॉ. अनिल चड्डा


क्यों है ख़ामोश आज ये बस्ती?
और आसमान भी
क्यों शोकाकुल है?
ढलते सूरज की बेला में
क्यों है आकाश इतना रक्तरंजित?
क्या किसी निरीह के
ख़ून के धब्बे
आसमान को स्याह किये दे रहे हैं?
या फिर,
लाल है आसमान आज इतना
किसी के अरमानों की
जलती चिता की
उठती हुई लपटों से!
लगता है शायद
ख़ुदा और भगवान
लड़ते-लड़ते
दम तोड़ चुके हैं!
और धर्म के ठेकेदार
सेंक रहे हैं हाथ,
उनकी जलती चिताओं से!


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें