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06.28.2008

जीने के लिए
रचनाकार
: डा. महेंद्र भटनागर

आरजू
डॉ. महेंद्र भटनागर

कितना अच्छा होगा
जब
दुनिया में सिर्फ रहेंगे
ईश्वर से अनभिज्ञ,
प्राणी-प्राणी
प्रेम-प्रतिज्ञ !

फिर
ना मंदिर होंगे
ना मसजिद
ना गुरुद्वारे
ना गिरजाघर !

कितनी होगी हैरत !
मारेगा कौन किसे ?
फिर कौन करेगा नफरत ?
सिर्फ़
मुहब्बत होगी,
होगी गैरत !

सब ‘तनखैया’ होंगे,
भैया-भैया होंगे !


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