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06.01.2008

जीने के लिए
रचनाकार
: डा. महेंद्र भटनागर

आतंक के घेरे में
डॉ. महेंद्र भटनागर

एक बहुत बड़ी और गहरी
साज़िश की गिरफ्त में है देश !

चालाक और धूर्त गिरोहों के
चंगुल में फँसा
छद्म धर्म और बर्बर जातीयता के
दलदल में धँसा,
             एक बहुत बड़ी और घातक
             जहालत में है देश !

आत्मीय रिश्तों का पक्षधर
दोस्ती के
सपनों व अरमानों का घर,
             एक बहुत बड़ी और भयावह
             दहशत में है देश !

संलग्न
सभ्य और नये इंसानों की अवतारणा में,
संलग्न
शांति और अहिंसा की
कठिनतम साधना में,
             एक बहुत बड़ी और भारी
             मुसीबत में है देश !


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