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06.01.2008

जीने के लिए
रचनाकार
: डा. महेंद्र भटनागर

आग्रह
डॉ. महेंद्र भटनागर

आदमी को
मत करो मजबूर !
इतना कि
बेइंसाफ़ियों को झेलते
              वह जानवर बन जाय !
या
बेइंतिहा
दर्द की अनुभूतियों को भोगते-
              वह खण्डहर बन जाय !

आदमी को
मत करो मजबूर
इतना कि उसको
ज़िन्दगी
लगने लगे
              चुभता हुआ
              रिसता हुआ
              नासूर !
           आदमी को
        मत करो
यों
इस कदर मजबूर !


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