जन-गण-मन
द्विजेन्द्र द्विज


भूमिका - ज़हीर क़ुरेशी


01 - ख़ुद तो ग़मों के ही रहे हैं
02 - अँधेरे चंद लोगों का अगर
03 - बंद कमरों के लिए
04 - बराबर चल रहे हो और
05 - हर क़दम पर खौफ़ की
06 - यह उजाला तो नहीं
07 - परों को काट के क्या
08 - हमारी आँखों के ख़्वाबों
09 - इन्हीं हाथों ने बेशक विश्व
10 - तहज़ीब यह नई है
11 - जो पल कर आस्तीनों में
12 - हुज़ूर, आप तो जा पहुँचे
13 - जाने कितने ही उजालों
14 - कटे थे कल जो यहाँ
15 - पृष्ठ तो इतिहास के
16 - बेशक बचा हुआ कोई
17 - देख, ऐसे सवाल रहने दे
18 - उनका विस्तार ही नहीं
19 - किसी के पास वो...
20 - नींव जो भरते रहे हैं
21 - आपकी कश्ती में बैठे
22 - उसके इरादे साफ़ थे
23 - सामने काली अँधेरी ...
24 - अगर वो कारवाँ को छोड़
25 - फ़स्ल सारी आप बेशक
26 - सुबह-सुबह यहाँ मुरझाई
27 - जो लड़ें जीवन की सब
28 - हर घड़ी रौंदा दुखों ..
29 - अब के भी आकर वो
30 - दिल-ओ-दिमाग़ को वो
31 - साथियो ! वक्तव्य को
32 - दिल की टहनी पे
33 - इन बस्तियों में धूल-धुआँ
34 - उनकी आदत बुलंदियों
35 - मत बातें दरबारी कर
36 - ज़िन्दगी से उजाले गए
37 - कैसी रही बहार की..
38 - अँधेरों की सियाही को
39 - हाँफ़ता दिल में फ़साना
40 - राज महल के नग़्में जो
41 - आसमानों में गरजना
42 - सबकी बोली है ज़लज़ले
43 - पर्वतों जैसी व्यथाएँ हैं
44 - चार दिन इस गाँव में
45 - कौंध रहे हैं कितने ही
46 - ये किताबें हिदायतों वाली
47 - जो थे बुलंद सही फ़ैसले
48 - चुप्पियों से ग़ज़ल बनाता
49 - उघड़ी चितवन
50 - चुप्पियाँ जिस दिन ख़बर
51 - एक चुप्पी आजकल सारे
52 - ज़िंदगी का गीत यूँ तो
53 - सन्नाटे से बढ़कर बोली
54 - सूरज डूबा है आँखों में
55 - रात-दिन हम से तो है
56 - जीवन के हर मोड़ पर