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02.07.2009
जन-गण-मन
द्विजेन्द्र ’द्विज’
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मत बातें दरबारी कर
द्विजेन्द्र ‘द्विज’


मत बातें दरबारी कर
सीधी चोट करारी कर

अब अपने आँसू मत पी
आहों को चिंगारी कर

काट दु:खों के सिर तू भी
अपनी हिम्मत आरी कर

अपने दिल के ज़ख़्मों -सी
काग़ज़ पर फुलकारी कर

सारी दुनिया महकेगी
अपना मन फुलवारी कर

आना है फिर जाना है
अपनी ठीक तैयारी कर

मीठी है फिर प्रेम-नदी
मत इसको यूँ खारी कर।


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