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07.14.2008

 

चराग़े - दिल
रचनाकार
: देवी नागरानी

"न बुझा सकेंगी ये आँधियाँ
ये चराग़े‍‍ दिल है दिया नहीं"
  चराग़े-दिल (गज़ल संग्रह)
देवी नागरानी
सरला प्रकाशन,
 १५८६/ १ ई, नवीन शाहदरा, दिल्ली - ११००३२/
२००७/ पृष्ठ १४४/ रु. २०० (दस डालर)
नाम : देवी नागरानी
जन्म : कराची, हैदराबाद - मई 11, 1941        
शिक्षा : बी.ए. ओसमान्या यूनिवर्सिटी से किया। 1961 से बम्बई में रहते हुए  माँटेसरी व गणित के डिप्लोमा हासिल किये जो मुझे यहँ न्यू जर्सी में एन.जे.सी. में 'अर्ली चाइल्डहुड' को पूरा कराने में मददगार साबित हुए हैं।
1972 से टीचर होने के नाते पढ़ती पढ़ाती रही हूँ और सही मानों में ज़िन्दगी की किताब के पन्ने नित नये मुझे एक नया सबक पढ़ा जाते हैं।
कलम ताए मात्र इक ज़रिया है, अपने अन्दर की भावनाओं को मन के समुन्द्र की गहराइयों से ऊपर सतह पर लाने का। इसे मैं रब की देन मानती हूँ, शायद इसलिये, जब हमारे पास कोई नहीं होता तो यह सहारा लिखने का एक साथी बनकर रहनुमाँ बन जाता है। पढ़ते पढ़ाते भी रही - नादान मैं गँवार। बेहतर पढ़ा सकी मुझे, यह ज़िन्दगी की किताब!
सम्पर्क : devi1941@yahoo.com