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12.24.2008

चरागे-दिल
रचनाकार
: देवी नागरानी

बददुआओं का है ये असर
देवी नागरानी

बददुआओं का है ये असर
हर दुआ हो गई बेअसर।

ज़ख्म अब तक हरे है मिरे
सूख कर रह गए क्यों शजर।

यूँ न उलझो किसी से यहाँ
फितरती शहर का है बशर।

राह तेरी मेरी एक थी
क्यों न बन पाया तू हमसफ़र।

वो मनाने तो आया मुझे
रूठ कर ख़ुद गया है मगर।

चाहती हूँ मैं ‘देवी’ तुझे
सच कहूँ किस क़दर टूटकर।


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