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02.07.2009

चरागे-दिल
रचनाकार
: देवी नागरानी

वो रूठा रहेगा उसूलों से जब तक
देवी नागरानी

वो रूठा रहेगा उसूलों से जब तक
नसीब उसके राजी न हों उससे तब तक।

कदम हर कदम आज़माइश है मेरी
मुझे इम्तहानों में रक्खोगी कब तक।

गुनह करके जीना बहुत ही कठिन है
कचोटे-ज़मीर उसका उसको न जब तक।

खुशी और ग़म मुझको यकसाँ रहे हैं
न आया कभी कोई शिकवा भी लब तक।

सदा पीठ पर ज़ख़्म खाए हैं देवी
ये तोहफे़ मिले मुझको अपनों से अब तक।


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