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02.07.2009

चरागे-दिल
रचनाकार
: देवी नागरानी

लगती है मन को अच्छी
देवी नागरानी

लगती है मन को अच्छी, शाइर गज़ल तुम्हारी
आवाज़ है ये दिल की, शाइर गज़ल तुम्हारी।

ये नैन-हों चुप है, फिर भी सुनी है हमने
उन्वां थी गुफ्तगू की, शाइर गज़ल तुम्हारी।

ये रात का अँधेरा, तन्हाइयों का आलम
ऐसे में सिर्फ साथी, शाइर गज़ल तुम्हारी।

नाचे हैं राधा मोहन, नाचे है सारा गोकुल
मोहक ये कितनी लगती, शाइर गज़ल तुम्हारी।

है ताल दादरा ये, और राग भैरवी है
संगीत ने सजाई, शाइर गज़ल तुम्हारी।

मन की ये भावनायें, शब्दों में हैं पिरोई
है ये बड़ी रसीली, शाइर गज़ल तुम्हारी।

अहसास की रवानी, हर एक लफ्ज़ में है
है शान शायरी की, शाइर गज़ल तुम्हारी।

अनजान कोई रिश्ता, दिल में पनप रहा है
धड़कन ये है उसीकी, शाइर गज़ल तुम्हारी।

दो अक्षरों का पाया जो ग्यान तुमने ‘देवी’
उससे निखर के आई, शायर गजल तुम्हारी।


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