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02.07.2009

चरागे-दिल
रचनाकार
: देवी नागरानी

स्वप्न आँखों में बसा पाए न हम
देवी नागरानी

स्वप्न आँखों में बसा पाए न हम
आँसुओं से भी सजा पाए न हम।

किस गिरावट ने हमें ऊँचा किया
कोई अंदाज़ा लगा पाए न हम।

दर्द के आँसू बहुत हमने पिये
गै़र का अहसाँ उठा पाए न हम।

हमने अश्कों से लिखी थी जो ज़ल
दुख है ये तुमको सुना पाए न हम।

आईना अपनी ही सब कहता रहा
हाले-दिल अपना सुना पाए न हम।

आज़माए हौसले हमने सदा
छू बुलँदी को कभी पाए न हम।


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