अन्तरजाल पर साहित्य
प्रेमियों की विश्राम स्थली
मुख्य पृष्ठ
01.18.2009

चरागे-दिल
रचनाकार
: देवी नागरानी

किस किस से बचाऊँ अपना घर
देवी नागरानी

किस किस से बचाऊँ अपना घर
जब हाथ में है सबके पत्थर।

जो बात सलीके से कह दे
पहचान बने उसका ये हुनर।

दुनिया की सराय के महमाँ हम
क्यों रोज़ है कहते मेरा घर।

बेख़ौफ रहे मुमताज़ वहाँ
जो ताज को समझे अपना घर।

है तख़्त के नाकाबिल राजा
कुदरत की नवाजिश है उसपर।

क्या हाल सुनाते हम उनको
जो हाल से अपने है बेख़बर।

दुख में हो जिनकी आँखें तर
उन्हें खार चुभें जैसे नश्तर।

पाने की तमन्ना कुछ भी नहीं
सजदे में झुका जब ‘देवी’ सर।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें