अन्तरजाल पर साहित्य
प्रेमियों की विश्राम स्थली
मुख्य पृष्ठ
12.24.2008

चरागे-दिल
रचनाकार
: देवी नागरानी

गुफ़्तगू हमसे वो करे जैसे
देवी नागरानी

गुफ़्तगू हमसे वो करे जैसे
खामुशी के हैं लब खुले जैसे।

तुझसे मिलने की ये सज़ा पाई
चांदनी-धूप सी लगे जैसे।

तोड़ता दम है जब भी परवाना
शम्अ की लौ भी रो पड़े जैसे।

यूँ ख़यालों में पुख़्तगी आई
बीज से पेड़ बन गये जैसे।

ये तो नादानी मेरे दिल ने की
और सज़ा मिल गई मुझे जैसे।

याद देवी को उनकी क्या आई
ज़ख़्म ताज़ा कोई लगे जैसे।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें