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06.27.2008

चरागे-दिल
रचनाकार
: देवी नागरानी

दिल को हम कब उदास रखते हैं
देवी नागरानी

दिल को हम कब उदास रखते हैं
आज भी उनकी आस करते हैं।

हमको ढूँढो नहीं मकानों में
हम दिलों में निवास करते हैं।

पहले ख़ुद ही उदास रहते थे
अब वो सबको उदास करते हैं।

चढ़के काँधों पे हो गए ऊँचे
इस तरह भी विकास करते हैं।

इत्तफ़ाकन निगाह उट्ठी थी
लोग क्या क्या क़यास करते हैं।


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