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06.08.2008

चराग़े - दिल
रचनाकार
: देवी नागरानी

दर्द बनकर समा गया दिल में
देवी नागरानी

दर्द बनकर समा गया दिल में
कोई महमान आ गया दिल में।

चाहतें लेके कोई आया था
आग सी इक लगा गया दिल में।

झूठ में सच मिला गया कोई
एक तूफ़ां उठा गया दिल में।

ख़ुशबुओं से बदन महक उठ्ठा
फूल ऐसे खिला गया दिल में।

मैं अकेली थी और अँधेरा था
जोत कोई जला गया दिल में।


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