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06.08.2008

चराग़े - दिल
रचनाकार
: देवी नागरानी

कितने पिये हैं दर्द के, आँसू बताऊँ क्या
देवी नागरानी

कितने पिये हैं दर्द के, आँसू बताऊँ क्या
ये दास्ताने-ग़म भी किसी को सुनाऊँ क्या?

रिश्तों के आईने में दरारें हैं पड़ गईं
अब आईने से चेहरे को अपने छुपाऊँ क्या?

दुश्मन जो आज बन गए, कल तक तो भाई थे
मजबूरियाँ हैं मेरी, मैं उनसे छुपाऊँ क्या?

चारों तरफ़ से तेज़ हवाओं में हूँ घिरी
इन आँधियों के बीच में दीपक जलाऊँ क्या?

दीवानगी में कट गए मौसम बहार के
अब पतझड़ों के ख़ौफ़ से दामन बचाऊँ क्या?

साज़िश ख़िलाफ़ मेरे दोस्तों की थी
इल्ज़ाम दुशमनों पे मैं ‘देवी’ लगाऊँ क्या?


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