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12.08.2007
चंदन-पानी
रचियता : दिव्या माथुर

विसर्प
दिव्या माथुर


अपने बदन से
उतार तो दिया
उस विसर्प को
            जो पला किया
            मेरे खून पर
             किंतु उसके छोड़े
             निशानों का क्या करूँ
जो जब तब
उभर आते हैं
और रिसने लगते हैं
छूतहे खून से.


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