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12.08.2007
चंदन-पानी
रचियता : दिव्या माथुर

साथ अमर है
दिव्या माथुर


घाव हैं आहें
अश्रु रुधिर है
धड़कन, टीसें
साँसे सुर हैं

नब्ज़ कहाँ है
प्राण किधर हैं
मौत से भी मन मेरा
निडर है

जब सोये
तब रात मना ली
और जब जागे
तभी सहर है

दुख अनगिन
सुख पल दो पल है
ये क्या कम है
साथ अमर है

मैं हूँ लहर
वो मेरा किनारा
मैं राही
वो मेरी डगर है.


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