मिलन दिव्या माथुर
सुबह के तारों सी बिखर जाऊँगी पानी के बुलबुले सी तेरे हाथों में निबट जाऊँगी मेरी रूह रुई के फाये सी तेरे साथ साथ भटकेगी याद करेगा पशेमान सा मुझे जब जब तू रक़ीब उन्हीं पलों में मुझे पायेगा तू अपने क़रीब।