कोहरा दिव्या माथुर
कुछ अच्छा याद करना चाहती हूँ पर तुम याद आ जाते हो घने कोहरे सा दिल-ओ-दिमाग़ पर छा जाते हो तमीज़ नहीं कर पाती फिर मैं अच्छे बुरे में.