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| 12.08.2007 |
| चंदन-पानी रचियता : दिव्या माथुर |
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दोहरा दो जो तुमने कहा |
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पोर पोर में फूल खिले हैं दिखे अधिक पीली मुझको चाँदी की लहरें हैं पहने कलियों ने सिर दिये हिला सुन लूँ जो पुरवाई कहे |
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